9 Cheetahs Arrive Kuno, India Total 48

कूनो में बोत्सवाना से आए 9 नए चीते, देश में चीतों की संख्या 48 पहुंची

बोत्सवाना से 9 चीते कूनो नेशनल पार्क पहुंचे। 6 मादा और 3 नर के साथ देश में कुल संख्या 48 हुई। जानिए ट्रांसलोकेशन और संरक्षण प्रोजेक्ट से जुड़ी अहम बातें।

By : स्वदेश डेस्क
कूनो में बोत्सवाना से आए 9 नए चीते, देश में चीतों की संख्या 48 पहुंची

श्योपुर की सुबह आज कुछ अलग थी। हल्की धूप, सुरक्षा घेरा, और आसमान में मंडराता हेलीकॉप्टर… जैसे ही कंटेनर उतारे गए, सबकी नजरें उसी तरफ टिक गईं। एमपी के कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी देश बोत्सवाना से 9 और चीते पहुंच गए। इनमें 6 मादा और 3 नर हैं। केंद्रीय वन मंत्री ने खुद मौजूद रहकर इन्हें कूनो की धरती पर छोड़ा। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है, जबकि अकेले कूनो में अब 45 चीते हो चुके हैं।

लंबी उड़ान के बाद कूनो की सरजमीं

चीते विशेष विमान से पहले ग्वालियर एयरबेस पहुंचे। वहां से भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर के जरिए उन्हें श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क लाया गया। पूरी प्रक्रिया सख्त निगरानी में हुई। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इन चीतों को कुछ समय के लिए बाड़ों में रखा जाएगा ताकि वे नए माहौल में ढल सकें। उसके बाद चरणबद्ध तरीके से जंगल में छोड़ा जाएगा।

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क्यों अहम है यह ट्रांसलोकेशन?

भारत में दशकों पहले चीते विलुप्त घोषित हो चुके थे। 2022 में नामीबिया से आए चीतों के साथ इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। अब बोत्सवाना से आए इन 9 चीतों के साथ प्रोजेक्ट को नई गति मिली है। कूनो नेशनल पार्क, जो कि कूनो नेशनल पार्क में स्थित है, को खास तौर पर चीतों के पुनर्वास के लिए तैयार किया गया है। यहां घास के विस्तृत मैदान और पर्याप्त शिकार उपलब्ध है, जो इनके लिए अनुकूल माना जाता है।  एशिया से लुप्त हो चुके चीतों का मात्र तीन वर्षों में सफल पुनर्स्थापन भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक सशक्त उदाहरण बन चुका है। प्रजनन करती मादा चीतों, स्वस्थ दूसरी पीढ़ी के शावकों और नए आवासों में विस्तार के साथ यह स्पष्ट है कि चीता अब भारत की वन पारिस्थितिकी का पुनः अभिन्न अंग बन गया है।

स्थानीय लोगों में उत्साह

केंद्रीय वन मंत्री ने कहा कि यह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। धीरे-धीरे देश में चीतों की स्थायी आबादी स्थापित करने का लक्ष्य है। श्योपुर और आसपास के इलाकों में पर्यटन से जुड़ी उम्मीदें भी जागी हैं। एक स्थानीय गाइड ने बताया, “जब पहले चीते आए थे, तब भी पर्यटकों की संख्या बढ़ी थी। अब तो और ज्यादा लोग आएंगे।” हालांकि वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चीतों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी प्राथमिकता है।  
 

 

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