ग्वालियर। चीतों को बसाने और उनकी आबादी बढ़ाने पर 112 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने के बाद अब वन विभाग को उनकी सुरक्षा की चिंता सता रही है। गोली लगने से हाल ही में चीते के शावक की मौत के बाद वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है। जिसमें केवल कूनो ही नहीं, बल्कि ग्वालियर-चंबल के पूरे वन क्षेत्र में चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए सेफ्टी प्लान की तैयारी अहम है। भारत सरकार के महत्वाकांक्षी चीता परियोजना की सफलता के लिये इसे जरूरी मानते हुए प्रधान मुख्यवन संरक्षक वन्यप्राणी समिति राजौरा ने इस बात की पुष्टि की हैं।
स्थायी तंत्र विकसित करने पर जोर
उन्होंने बताया कि चीतों के रहवास के साथ उनकी सुरक्षा और निगरानी का स्थायी तंत्र विकसित करने पर जोर रहेगा। भारत सरकार की एजेंसियों के साथ मिलकर जहां सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को चिंहित करते हुए व्यापक सुरक्षा योजना पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिये विशेषज्ञों से विमर्श शुरू कर दिया गया है।
अवैध शिकार वाले क्षेत्र होंगे चिंहित
योजना के तहत ग्वालियर-चंबल संभाग के वन क्षेत्रों में मानवीय गतिविधियों और अवैध शिकार की आशंका वाले क्षेत्रों की भी पहचान की जाएगी। इसके आधार पर सुरक्षा के लिए अतिरिक्त जरूरी इंतजाम किये जाएंगे। चीता लैंड स्केप के जंगल को जोन में बांटा जाएगा।
इसलिये चीतों की सुरक्षा पर उठे सवाल
25 अक्टूबर को मुरैना के वन क्षेत्र में निर्वा का 19 माह का नर शावक घायल मिला था। उपचार के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए, लेकिन गंभीर चोटों के कारण 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। घटना की जांच के लिए वन और पुलिस अधिकारियों की एसटीएफ गठित की गई है। केंद्र की एजेंसियां भी जांच कर रही हैं। इस घटना ने कूनो से बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं।
इनके सवाल ढूंढ रहा है वन विभाग
सैटेलाइट कॉलर और ट्रैकिंग टीम के बावजूद चीते को गोली लगने की जानकारी समय पर क्यों नहीं मिली?
संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर शिकारियों की आवाजाही कैसे हुई
क्या स्थानीय स्तर पर वनकर्मियों की निगरानी में चूक हुई?
क्या यह सुनियोजित शिकार था या ग्रामीणों द्वारा आत्मरक्षा में गोली चलाई गई
कूनो से बाहर विचरण करने वाले चीतों की सुरक्षा के लिए अलग व्यवस्था या हो सकती है।