अगले वर्ष होने वाले नगर निगम और नगर पालिका चुनावों से पहले सरकार ने महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया के लिए अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश में आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को दोनों पदों के आरक्षण के लिए अधिकृत अधिकारी घोषित किया गया है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मध्यप्रदेश नगरपालिका (महापौर और अध्यक्ष) पदों का आरक्षण नियम, 1999 के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाएगा। इसलिए नगरीय निकायों के आगामी निर्वाचन के लिए महापौर एवं अध्यक्ष पदों के आरक्षण की कार्रवाई के लिए आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को अधिकृत किया गया है। राज्य सरकार ने इस संबंध में 12 जून को आदेश जारी कर दिए हैं।
2022 में हुआ था महापौर पदों का आरक्षण
| श्रेणी | नगर निगम |
|---|---|
| अनारक्षित | इंदौर, जबलपुर, रीवा, सिंगरौली |
| महिला (अनारक्षित) | ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी |
| ओबीसी महिला | भोपाल, खंडवा |
| ओबीसी | रतलाम, सतना |
| अनुसूचित जाति (अजा) | उज्जैन |
| अनुसूचित जाति महिला | मुरैना |
| अनुसूचित जनजाति (अजजा) | छिंदवाड़ा |
महिलाओं के लिए आरक्षित हैं 50 प्रतिशत सीटें
वर्तमान व्यवस्था में महापौर और अध्यक्ष दोनों पदों के लिए 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाते हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए आरक्षण संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर निर्धारित किया जाता है।इसी प्रकार अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए निकायों में 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आरक्षण का रोटेशन इस प्रकार किया जाता है कि पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को अवसर मिल सके।सभी 16 नगर निगमों के लिए प्रत्येक चुनाव से पहले लॉटरी के माध्यम से यह तय किया जाता है कि किस नगर निगम में महापौर का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा।