भोपाल। मध्यप्रदेश में दिव्यांग शिकायत प्रतितोष अधिकारी को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। अब राज्य के हर सरकारी विभाग में दिव्यांगों की शिकायत सुनने और उसका समाधान करने के लिए अलग अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इस संबंध में सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
हर विभाग में नियुक्त होंगे शिकायत अधिकारी
दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपने जिले के हर विभाग में एक शिकायत प्रतितोष अधिकारी नियुक्त करें। यह अधिकारी दिव्यांगों से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करेगा और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। साथ ही, शिकायतों का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित तरीके से रखा जाएगा।
पहले भी दिए गए थे निर्देश, अब सख्ती
आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने यह निर्देश दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले भी सरकारी दफ्तरों में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ। अब मध्यप्रदेश दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2017 के तहत इसे अनिवार्य रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है।
कलेक्टरों को देनी होगी रिपोर्ट
हर विभाग में नियुक्त किए गए शिकायत अधिकारी की जानकारी कलेक्टरों को एकत्रित कर आयुक्त कार्यालय को भेजनी होगी। बताया गया है कि जनवरी 2025 में भी इस संबंध में पत्र जारी किया गया था, लेकिन अब तक कई जिलों से रिपोर्ट नहीं मिली है। इस बार प्रशासन इसे लेकर अधिक गंभीर नजर आ रहा है।
दिव्यांग नीति बनाने की तैयारी तेज
दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया इस दिशा में लगातार सक्रिय हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में दिव्यांग नीति बनाने की अनुमति भी ले ली है। इसके तहत विभिन्न राज्यों की नीतियों का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और अधिकारियों से चर्चा कर एक व्यापक नीति तैयार करने पर काम चल रहा है।
इसी साल लागू हो सकती है नई नीति
प्रशासन की योजना है कि इसी वर्ष दिव्यांगजन नीति का मसौदा तैयार कर उसे मंजूरी के लिए भेजा जाए। मंजूरी मिलने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस पहल से उम्मीद है कि दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी और उन्हें सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा।