मध्यप्रदेश के 55 जिलों में 40 नई चलित लैबों की शुरुआत, परखी जाएगी गुणवत्ता
खाद्य पदार्थों की मौके पर ही तत्काल जांच के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में 40 नई चलित लैब शुरू की जाएंगी। नई सुविधा के तहत इन लैबों में दूध की जांच अब 15 मानकों पर की जा सकेगी।वर्तमान में प्रदेश में 15 चलित लैब संचालित हैं, जिनमें केवल तीन मानकों पर ही जांच हो पाती है। नई लैबों के शुरू होने के बाद दूध में पानी, डिटर्जेंट या अन्य केमिकल की मिलावट, वसा की मात्रा सहित कई अन्य मापदंडों की जांच की जा सकेगी।
मिलावटखोरी पर बड़ा प्रहार
नई चलित लैबों में फल और सब्जियों की जांच भी की जाएगी। इससे सब्जियों में केमिकल के छिड़काव या इंजेक्शन जैसी मिलावट का पता लगाया जा सकेगा। हालांकि बैक्टीरिया और फंगस की उपस्थिति की जांच इन लैबों में संभव नहीं होगी।नई लैबों के शुरू होने के बाद प्रदेश के सभी 55 जिलों में चलित लैब की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी।
एफएसएसएआई तैयार कर रहा नए मानक
बताया जा रहा है कि नई लैबों के लिए Food Safety and Standards Authority of India (एफएसएसएआई) नए मानक तैयार कर रहा है। इनमें कुछ मापदंड यूरोपियन मानकों के अनुरूप रखे जाएंगे।इन मानकों में लैब का आकार, उसमें लगाए जाने वाले उपकरणों के प्रकार, जांच के मापदंड और परीक्षण की गुणवत्ता शामिल है।एफएसएसएआई ने लगभग एक वर्ष पहले लैब तैयार करने के लिए राज्य सरकार को राशि उपलब्ध कराई थी। इस परियोजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन कर रही है।
प्रति लैब बढ़ेगा खर्च
नए मानकों के अनुसार एक लैब तैयार करने में प्रति यूनिट 15 से 20 लाख रुपये तक अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है। इसे देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर प्राधिकरण को भेजा है।केंद्र से राशि मिलने के बाद नई लैबों को तैयार करने में लगभग छह महीने का समय लग सकता है।