मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन लेने की प्रक्रिया अब और आसान होने जा रही है। प्रदेश के सवा करोड़ से अधिक पात्र परिवारों को जल्द ही अंगूठा लगाने या ओटीपी की परेशानी से राहत मिलेगी। सरकार साल 2026 के अंत तक फेस रिकग्निशन आधारित राशन वितरण प्रणाली लागू करने की तैयारी में है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अभी तक उचित मूल्य दुकानों पर बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) के जरिए राशन दिया जा रहा है। लेकिन कई बार तकनीकी दिक्कतों, नेटवर्क समस्या या बुजुर्ग एवं दिव्यांग हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट मैच न होने के कारण वितरण में परेशानी आती रही है।
खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत के अनुसार, नई व्यवस्था में पात्र हितग्राहियों की पहचान उनके चेहरे के आधार पर की जाएगी। यानी पीओएस मशीन पर फेस रिकग्निशन से ही राशन मिल जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।वर्तमान में जिन हितग्राहियों का बायोमेट्रिक सत्यापन विफल हो जाता है, उन्हें आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर राशन दिया जाता है। वहीं, जो लोग शारीरिक रूप से दुकान तक नहीं पहुंच पाते, उनके लिए करीब 44,671 परिवारों ने नामिनी की व्यवस्था कर रखी है।
वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना के तहत भी लाभार्थियों को कहीं से भी राशन लेने की सुविधा मिल रही है। आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 36,486 परिवार अन्य राज्यों से और 7,252 बाहरी परिवार मध्यप्रदेश से हर महीने राशन प्राप्त कर रहे हैं।सरकार का मानना है कि फेस रिकग्निशन तकनीक लागू होने से न सिर्फ वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पात्र लोगों को बिना किसी बाधा के समय पर राशन मिल सकेगा।
12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूं की खरीदी
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अब तक 28 हजार 199 किसानों से 12 लाख 52 हजार 470 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। किसानों को 10 करोड़ 23 लाख रुपये का भुगतान उनके बैंक खातों में किया जा चुका है।गेहूं का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूं का उपार्जन शुरू किया जाएगा।