भोपाल। मध्य प्रदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग को अगली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति का प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अगले सोमवार होने वाली मोहन कैबिनेट की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
कैबिनेट बैठक के दौरान तबादला नीति पर अनौपचारिक चर्चा भी हुई, जिसमें कई मंत्रियों ने स्वैच्छिक तबादलों पर तय सीमा खत्म करने की मांग रखी। इस मुद्दे पर जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
स्वैच्छिक तबादलों में लिमिट नहीं होनी चाहिए
जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने कहा कि नई तबादला नीति में स्वैच्छिक आधार पर होने वाले तबादलों की कोई लिमिट तय नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना था कि जो कर्मचारी या अधिकारी स्थानांतरण चाहते हैं, उन्हें मौका मिलना चाहिए। कई अन्य मंत्रियों ने भी विजय शाह की इस मांग का समर्थन किया। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार इस सुझाव पर विचार करेगी।
पिछली बैठक में भी उठा था तबादला नीति का मुद्दा
सूत्रों के मुताबिक पिछली कैबिनेट बैठक में भी तबादला नीति को लेकर चर्चा हुई थी। उस दौरान मंत्रियों ने सुझाव दिया था कि प्रशासकीय और स्वैच्छिक तबादलों को अलग-अलग रखा जाए। मंत्रियों का मानना था कि दोनों को एक साथ जोड़ने से ट्रांसफर का कोटा तय हो जाता है, जिससे विधायकों और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी बढ़ती है।
पीएम मोदी की अपील पर सीएम ने जनता से की अपील
कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का पालन करने को कहा है। उन्होंने लोगों से एक साल तक गोल्ड खरीदने से बचने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने और विदेश यात्राओं को सीमित रखने की अपील की। हालांकि जब मीडिया ने मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या को लेकर सवाल पूछा तो मंत्री काश्यप स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ी
कैबिनेट बैठक में राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की सीमा बढ़ाने का भी फैसला लिया गया। अब राज्य मंत्री एक व्यक्ति को साल में 25 हजार रुपए तक की सहायता राशि दे सकेंगे। पहले यह सीमा 16 हजार रुपए थी। वहीं कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही 40 हजार रुपए तय की जा चुकी है।
डामर महंगा होने पर सरकार का बड़ा फैसला
वैश्विक संकट के कारण बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इसका असर सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों पर पड़ रहा है। इसे देखते हुए सरकार ने तय किया है कि पहले से स्वीकृत परियोजनाओं में डामर की बढ़ी कीमत का अंतर भुगतान किया जा सकेगा। यह फैसला 10 करोड़ रुपए तक की सड़क परियोजनाओं पर लागू होगा। अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में 500 से ज्यादा सड़क परियोजनाएं इस दायरे में आ सकती हैं।
29540 करोड़ रुपए की योजनाओं को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों की कुल 29540 करोड़ रुपए की योजनाओं को 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि तक जारी रखने का फैसला लिया गया। इनमें लोक निर्माण, जल संसाधन, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और विधि विभाग की कई प्रमुख योजनाएं शामिल हैं।
बुधनी मेडिकल कॉलेज परियोजना की लागत बढ़ी
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से बुधनी में नए मेडिकल कॉलेज, अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना की संशोधित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। पहले इस परियोजना की लागत 714 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर 763 करोड़ रुपए हो गई है। कैबिनेट ने बढ़ी हुई लागत को मंजूरी दे दी है।
6500 किसानों को मिलेगा सिंचाई का लाभ
जल संसाधन विभाग की 163 करोड़ रुपए लागत वाली खुमानसिंह शिवाजी जलाशय सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। सरकार के अनुसार इस परियोजना से करीब 6500 किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।