भोपाल। मध्य प्रदेश में तंबाकू सेवन को लेकर कुछ राहत भरी तस्वीर सामने आई है, लेकिन चिंता अब भी बरकरार है। केंद्र सरकार की स्वास्थ्य संबंधी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, फिर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। आज भी प्रदेश की लगभग हर चौथी महिला और हर दूसरा पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में तंबाकू सेवन की दर 26.1 प्रतिशत से घटकर 22.8 प्रतिशत हो गई है। वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 51.7 प्रतिशत से घटकर 48.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
मध्य प्रदेश में तंबाकू सेवन
कमी आई, लेकिन खतरा बरकरार
🚬 महिलाएं (15+ वर्ष)
| NFHS-5 | NFHS-6 |
|---|---|
| 26.1% | 22.8% |
⬇️ 3.3 प्रतिशत अंक की कमी
🚬 पुरुष (15+ वर्ष)
| NFHS-5 | NFHS-6 |
|---|---|
| 51.7% | 48.3% |
⬇️ 3.4 प्रतिशत अंक की कमी
NFHS-6 (2023-24) रिपोर्ट
पुरुषों में ज्यादा, महिलाओं में भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट बताती है कि तंबाकू सेवन की समस्या पुरुषों में कहीं अधिक व्यापक है। प्रदेश में लगभग हर दूसरा पुरुष तंबाकू का उपयोग करता है। हालांकि महिलाओं में भी यह अनुपात कम नहीं है। 22.8 प्रतिशत महिलाओं द्वारा तंबाकू सेवन यह संकेत देता है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में यह आदत अब भी गहराई से मौजूद है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू सेवन सीधे तौर पर कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की बीमारियों और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर समस्याओं से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश में पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे के बढ़ते मामलों के बीच तंबाकू सेवन एक अतिरिक्त स्वास्थ्य संकट बन सकता है।
जागरूकता अभियानों का दिखा असर
विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में चलाए गए जागरूकता अभियानों, तंबाकू उत्पादों पर चेतावनी संदेश, सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कारण तंबाकू सेवन में कुछ कमी आई है। हालांकि कमी की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है और अभी भी बड़ी आबादी इसकी गिरफ्त में है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा चुनौती
रिपोर्ट के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों और कम शिक्षित वर्गों में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति अपेक्षाकृत अधिक बनी हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के लिए जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
यदि तंबाकू सेवन में तेजी से कमी नहीं आई तो आने वाले वर्षों में कैंसर, हृदय रोग और श्वसन संबंधी बीमारियों का बोझ स्वास्थ्य व्यवस्था पर और बढ़ सकता है। ऐसे में तंबाकू नियंत्रण को सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं में बनाए रखना जरूरी होगा।