चीतों को भारत की धरती पर पुनर्स्थापित करने वाले कूनो की रौनक अब दुर्लभ प्रजाति की कैराकल बिल्ली भी बढ़ाएगी। अमूमन राजस्थान और गुजरात में पाई जाने वाली यह बिल्ली नाम मात्र की संख्या में बची है। दशकों बाद कूनो में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर साझा करते हुए इसे प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया है। इधर, कूनो प्रबंधन ने दावा किया है कि कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान पार्क में दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल प्रजाति की तस्वीर कैद हुई है।
विशेषज्ञ इसे कूनो की समृद्ध जैव विविधता और बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मान रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई दशकों बाद इस क्षेत्र में कैराकल का दिखना इस बात का संकेत है कि कूनो का प्राकृतिक आवास दुर्लभ वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रहा है।
इसलिए इसकी उपस्थिति बड़ी बात
भारत में कैराकल की संख्या 50 से भी कम बताई जाती है। ये मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं। वर्ष 1990 से 2020 के बीच इनकी संख्या में 95 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। यह प्रजाति भारत में बेहद कम दिखाई देती है, इसलिए इसकी मौजूदगी को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
राजस्थान या गुजरात के बाद मप्र होगा नया बसेरा
कैमरे में दर्ज कैराकल को लेकर कूनो पार्क प्रबंधन यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि यहां इसका स्थायी पर्यावास है या नहीं। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह राजस्थान या गुजरात से चलकर यहां पहुंची हो सकती है। यदि कूनो की आबोहवा इसे रास आती है, तो मध्यप्रदेश इनका नया स्थायी बसेरा बन सकता है।
यह है खासियत...
कैराकल एक रहस्यमयी और रात्रिचर जंगली बिल्ली है, जिसकी पहचान उसके कानों पर मौजूद काले गुच्छेदार लंबे बालों से होती है। माना जाता है कि यह इतनी फुर्तीली होती है कि उड़ते हुए पक्षियों को भी झपटकर पकड़ सकती है। इतिहास में इसे शाही शिकारी जानवर माना जाता था।
मुख्यमंत्री ने बताया बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैराकल की उपस्थिति को संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का सकारात्मक संकेत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए इसे प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया।