भोपाल-नर्मदापुरम् नेशनल हाईवे का वह हिस्सा, जो रातापानी अभयारण्य के बीच से गुजरता है, इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 12 किलोमीटर लंबे इस हिस्से को साउंड प्रूफ कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है, ताकि वन्य जीवों को वाहनों के शोर से कम से कम परेशानी हो।
घने जंगलों के बीच बनी यह सड़क अब आधुनिक वन्यजीव संरक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर का अनोखा उदाहरण बन चुकी है। हालांकि, जहां यह हाईवे वन्यजीवों के लिए राहत लेकर आया है, वहीं कई लोगों को पुराने प्राकृतिक नजारों की कमी भी महसूस हो रही है।
वन्य जीवों के लिए बनाए गए खास अंडरपास
वन्य जीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए यहां 7 अंडरपास बनाए गए हैं। इनके ऊपर से वन्य जीव विचरण करते हैं, जबकि नीचे से वाहन गुजरते हैं। चारों ओर फैले हरे-भरे जंगलों के बीच बनी इस सड़क के दोनों तरफ 3-3 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाई गई है, जो पूरी तरह साउंड प्रूफ है।वन्य जीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए यह खास गलियारा तैयार किया गया है। ड्रोन कैमरे से देखने पर रातापानी अभयारण्य की यह सड़क बेहद खूबसूरत नजर आती है। सड़क किनारे बनी हरे रंग की साउंड प्रूफ दीवारें इसकी अलग पहचान बनाती हैं।
हाईवे शानदार बना, लेकिन पुरानी यादें अब भी खास
करीब तीन साल पहले यह सड़क काफी संकरी थी। उस समय घने पेड़ों से ढंकी सड़क के दोनों तरफ गांव के लोग ताजी सब्जियां और फल बेचते नजर आते थे। सड़क पर आम के पेड़ों से गिरी कैरियां राहगीरों को आसानी से मिल जाती थीं। कई यात्री वाहन रोककर घर से लाए नाश्ते का आनंद लेते थे।लेकिन अब इस हिस्से में दूर-दूर तक सिर्फ सड़क ही दिखाई देती है। राजधानी के मिनाल निवासी डॉ. अखिल चौधरी ने बताया कि इस सड़क से वाहन में गुजरते समय एक अलग अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि सड़क अच्छी और आधुनिक बनी है, लेकिन दोनों तरफ ऊंची दीवारें होने के कारण अभयारण्य का प्राकृतिक दृश्य दिखाई नहीं देता।उन्होंने माना कि इस सड़क के बनने से रातापानी के जंगलों में रहने वाले वन्य जीवों को काफी राहत मिली है। साथ ही वाहन चालकों को भी सुरक्षित और अलग तरह का अनुभव मिलता है।