भारत हिंदू राष्ट्र है, इसे आज सभी स्वीकार कर रहे। जो संसद से सड़कों तक संघ का विरोध करते थे वे आज संसद में बहस के दौरान स्वीकार करते हैं कि हम हिंदू हैं, यह गर्व की बात है। भारत सदियों से गौरवशाली था और आज भी गौरवशाली है। बीच के समय में अंग्रेजों ने भारत के गौरव पर प्रश्रचिंह्न लगाए, लेकिन यदि इतिहास उठाकर देखें तो जानकारी में आएगा कि आज से 3,500 वर्ष पूर्व की पाण्डुलिपि में लिखा है कि भारत सदियों से, सनातन काल से एक राष्ट्र रहा है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने कही। सहसरकार्यवाह शुक्रवार को लोकमान्य टिळक शिक्षा परिसर, नीलगंगा में आयोजित 40वीं डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर 100 वर्ष की संघ यात्रा' विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि, उज्जैन काल-मोक्ष और ज्ञान की त्रिवेणी है। यहां व्याख्यानमाला का सतत 40 वर्ष तक चलना एक सामान्य बात नहीं है। अपने विषय को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि, राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने अपनी कविता में लिखा था-ऋषि भूमि भारत वर्ष है। उन्होंने वर्णन किया था कि प्राचीन समय में भारत कैसा रहा होगा। आगे बताया कि, उस समय का भारतवर्ष भी दुनिया को दिशा देनेवाला रहा। वैसा ही भारत फिर से बनना चाहिए...। उनके इस सपने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा 100 वर्ष से निरंतर चल रही है।
यह यात्रा साधारण नहीं, असामान्य है। कोई भी संगठन प्रारंभ होता है, तो एक निश्चित कालखंड तक चलता है और फिर बंद हो जाता है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आज स्वीकारोक्ति तक पहुंच चुका है। इसके पूर्व इसका उपहास हुआ है। जब डॉ हेडगेवार ने संघ यात्रा प्रारंभ की, तो पुणे के लोग कहते थे कि नागपुर के संतरे वहीं बेचो, लेकिन डॉ. हेडगेवार कहते थे कि एक दिन ऐसा आएगा जब नागपुर का संतरा पूरे देश में मुहमांगे दाम पर बिकेगा। संघ आगे बढ़ता चला गया। संघ का विरोध भी बढ़ा। वर्ष 1948 में संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगा। स्वयंसेवक जब गलियों से निकलते, तो लोग दरवाजा बंद कर लेते थे। बाद में संघ से यह आरोप समाप्त हुआ.
वर्ष-1948 में ही देश की स्वतंत्रता के लिए 77 हजार स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह किया और जेल गए। वर्ष 1975 में इंदिरा गांधी का चुनाव न्यायालय ने निरस्त किया और आरोप संघ पर लगा। देशभर में 67 हजार स्वयंसेवकों को जेल के पीछे भेज दिया गया। जब चुनाव घोषित हुआ और जनमत आया, तो देश में पुनः लोकतंत्र स्थापित हुआ। संघ कार्य फिर से प्रारंभ हो गया। श्री चक्रधर ने कहा कि, विजयादशमी पर 37 लाख स्वयंसेवक गणवेश में निकले। देश में 83 हजार शाखाएं हैं। उस काल में नो आरएसएस कहा जाता था, अब केएनओडब्ल्यू आरएसएस हो गया है।
संघ को समझना होगा। एक वर्ष पूर्व अक्टूबर माह में ज्वाइन आरएसएस पर साढ़े पांच हजार रिक्वेस्ट आई थी। बीते अक्टूबर माह में यह 48 हजार हो गई। संघ को जानने, समझने के लिए लोगों में जिज्ञासा बढ़ गई है। संघ कार्य समझना है तो डॉ. हेडगेवार को समझना होगा। संघ गंगा की गंगोत्री डॉ. हेडगेवार हैं कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री नारायण व्यास ने की। मंच पर डॉ. हेडगेवार स्मृति व्याख्यानमाला समिति के अध्यक्ष नितिन गरूड़ भी विराजित थे। शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। केशव अर्चना पश्चात अतिथि परिचय क्षमाशील मिश्रा ने दिया। अतिथि स्वागत उल्लास वैद्य एवं प्रशांत शर्मा ने किया। गीत सार्थक गहलोत ने प्रस्तुत किया। वंदे मातरम् की प्रस्तुति अनामिका सोनी ने दी। मंच संचालन राहुल विपट ने किया। आभार राजेश गर्ग ने माना।
आज का व्याख्यान:व्याख्यानमाला के दूसरे दिवस शनिवार को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदुत्व विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय संबोधित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सुधीर गवारीकर करेंगे।