आरटीई योजना: 15 हजार सीटें अभी भी खाली

MP RTE Admission: तीन लॉटरी के बाद भी 15 हजार गरीब बच्चों को नहीं मिली मुफ्त शिक्षा 

मध्यप्रदेश में तीन ऑनलाइन लॉटरी के बावजूद आरटीई के तहत 15 हजार सीटें खाली। गरीब बच्चों के प्रवेश में क्षेत्र सीमा बनी बड़ी बाधा।

By : नरेंद्र कुमार
MP RTE Admission:  तीन लॉटरी के बाद भी 15 हजार गरीब बच्चों को नहीं मिली मुफ्त शिक्षा 

मध्यप्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए संचालित शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना अभी भी अपने लक्ष्य से दूर नजर आ रही है। तीन चरण की ऑनलाइन लॉटरी पूरी होने के बावजूद प्रदेश के निजी स्कूलों में करीब 15 हजार सीटें अब भी खाली हैं।शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सीटें आरक्षित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पात्र बच्चों तक योजना की प्रभावी पहुंच और प्रवेश प्रक्रिया को और सरल बनाने की आवश्यकता है।

1.22 लाख सीटें तय, फिर भी सभी बच्चों को प्रवेश नहीं

प्रदेश के करीब 30 हजार निजी स्कूलों में इस वर्ष आरटीई के तहत 1.22 लाख सीटें निर्धारित की गई थीं। इनमें से अब तक 1,07,600 बच्चों को प्रवेश मिल चुका है, जबकि करीब 15 हजार सीटों पर अब भी प्रवेश नहीं हो सका है। यानी लगभग 88 प्रतिशत सीटें भर चुकी हैं, जबकि 12 प्रतिशत सीटें अब भी रिक्त हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शेष सीटों के लिए एक और चरण शुरू किए जाने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर रिक्त सीटें छोटे निजी स्कूलों में हैं, जहां अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला नहीं कराना चाहते। राज्य शिक्षा केंद्र इन सीटों को भरने के लिए चौथी प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

क्षेत्र सीमा के कारण नहीं मिल पा रहा प्रवेश

निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि आरटीई में लागू क्षेत्र सीमा (एरिया लिमिट) भी बड़ी बाधा बन रही है। अधिकांश मजदूर और गरीब परिवार रोजगार के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं, लेकिन नियमों के अनुसार बच्चे को उसी क्षेत्र के स्कूल में प्रवेश मिल सकता है, जहां अभिभावक का स्थायी निवास दर्ज है।उदाहरण के तौर पर, यदि कोई परिवार मूल रूप से रायसेन जिले के दीवानगंज का निवासी है, लेकिन मजदूरी के लिए भोपाल में रह रहा है, तो वह अपने बच्चे का आरटीई के तहत भोपाल के निजी स्कूल में प्रवेश नहीं करा सकता। उसे दीवानगंज के स्कूल में ही प्रवेश मिलेगा। ऐसे नियमों का पालन प्रवासी और आदिवासी परिवारों के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन साबित हो रहा है।

दो लाख से अधिक आवेदन, लेकिन सीटें कम

राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष आरटीई के तहत 2,10,422 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 1,78,714 बच्चे पात्र पाए गए और उन्हें लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया गया।पहले दो चरणों की लॉटरी में करीब 90 हजार बच्चों का स्कूल आवंटन हुआ, लेकिन लगभग 30 हजार बच्चों ने ही प्रवेश लिया। इसके बाद तीसरे चरण की लॉटरी निकाली गई, जिसमें पहले चरणों में प्रवेश नहीं लेने वाले बच्चों को भी शामिल किया गया। इसके बावजूद केवल 7,630 सीटें ही भर सकीं।फिलहाल तीसरे चरण के चयनित विद्यार्थियों को 20 जुलाई तक प्रवेश लेना है। इसके बाद भी यदि सीटें खाली रहती हैं, तो चौथे चरण पर निर्णय लिया जाएगा।

छह वर्षों में घटे प्रवेश

आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सीटों और प्रवेश दोनों की स्थिति चिंताजनक रही है।वर्ष 2021-22 में आरटीई के तहत 1,99,741 आवेदन आए थे। इनमें से 1,29,690 बच्चों को प्रवेश मिला था, जबकि करीब 70 हजार बच्चे प्रवेश से वंचित रह गए थे।वर्ष 2026-27 में आवेदन बढ़कर 2,10,422 हो गए, जिनमें 1.78 लाख आवेदन पात्र पाए गए, लेकिन उपलब्ध सीटें केवल 1.22 लाख ही थीं।

फैक्ट फाइल

  • लॉटरी में शामिल पात्र बच्चे: 1,78,714
  • कुल आरटीई सीटें: 1,22,551
  • स्कूल आवंटन: 1,17,536
  • अब तक प्रवेश: 1,00,526
  • अब तक खाली सीटें: 22,025
  • तीसरे चरण में भरी गई सीटें: 7,630

क्या बोले अधिकारी

डॉ. अरुण सिंह, अपर संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र, भोपाल ने कहा, "तीसरे चरण के बाद भी यदि सीटें खाली रहती हैं, तो अगले चरण पर विचार किया जाएगा। 20 जुलाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।"

निजी स्कूल संचालकों की राय

अजित सिंह, अध्यक्ष, मध्यप्रदेश निजी स्कूल संचालक संघ ने कहा-"आरटीई की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया और क्षेत्र सीमा के नियमों के कारण मजदूरी करने वाले गरीब अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश नहीं करा पा रहे हैं। इन नियमों में व्यावहारिक बदलाव की आवश्यकता है।"

 

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