शिवपुरी नगर पालिका में कथित भ्रष्टाचार मामले को लेकर अब हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. नपाध्यक्ष और सीएमओ का नाम मामले में शामिल नहीं किए जाने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, एसपी शिवपुरी और एसडीओपी कोलारस समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
कोर्ट ने मामले के जल्द निराकरण के उद्देश्य से अगली सुनवाई की तारीख 5 मई तय की है, अदालत ने अधिकारियों से जवाब मांगा है कि जब भुगतान संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर मौजूद हैं, तो अब तक संबंधित अधिकारियों के नाम मामले में क्यों नहीं जोड़े गए।
बिना काम भुगतान मामले में पहले हो चुकी गिरफ्तारी
नगरपालिका शिवपुरी में हुए इस कथित भ्रष्टाचार मामले में प्रशासनिक जांच के बाद दो इंजीनियरों और एक ठेकेदार के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, आरोप था कि बिना कार्य कराए ही नगरपालिका से भुगतान जारी कर दिया गया।
मामले में आरोपी बने ठेकेदार की जमानत याचिकाएं भी पहले खारिज हो चुकी हैं। उस दौरान न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर से भुगतान जारी हुआ. उनकी भूमिका की भी जांच जरूरी है।
बताया जा रहा है कि भुगतान फाइलों पर इंजीनियरों के अलावा तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, सीएमओ और नपाध्यक्ष के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।
पार्षदों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
नगरपालिका में भ्रष्टाचार का विरोध कर रहे पार्षदों ने पहले पुलिस अधीक्षक शिवपुरी को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, उस समय पुलिस की ओर से नगरपालिका एक्ट का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।
हालांकि लंबे समय तक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ने पर पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अब हाईकोर्ट द्वारा नोटिस जारी होने के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।
5 मई की सुनवाई पर टिकी नजरें
सूत्रों के मुताबिक मामले की सुनवाई अब ऐसे जस्टिस के समक्ष होगी जिन्हें त्वरित कार्रवाई के लिए जाना जाता है. इससे आगामी सुनवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों पर आगे और सख्त निर्देश जारी हो सकते हैं।
रिश्वत प्रकरण के बाद बढ़ीं सीएमओ की मुश्किलें
इसी बीच शिवपुरी नगरपालिका के सीएमओ की मुश्किलें एक अन्य मामले में भी बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में लोकायुक्त ने करोसिया बाबू को 40 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था. कार्रवाई के दौरान आरोपी ने कथित रूप से सीएमओ का नाम भी लिया था।
इसके अलावा गांधी पार्क में आयोजित निशुल्क स्वदेशी मेले के मामले में भी लोकायुक्त भोपाल के उप विधि सलाहकार ने सीएमओ से 23 जून तक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, यह शिकायत जिला अभिभाषक संघ के जिलाध्यक्ष एडवोकेट विजय तिवारी द्वारा की गई थी।