शिवपुरी शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गई, लेकिन इसके बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा। दरअसल, जिस नो-एंट्री नियम को सख्ती से लागू होना चाहिए, वहीं अब खुलेआम उसकी धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। भारी वाहन ही नहीं, यात्री बसें भी शहर के अंदर बेखौफ दौड़ रही हैं।
हादसे के बाद भी क्यों नहीं बदली तस्वीर?
गतरोज हुए हादसे ने पूरे शहर को हिला दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा, लेकिन अब सवाल उठ रहा है क्या वो सिर्फ दिखावे तक ही सीमित था? आज भी शहर के कई हिस्सों में वही पुराना हाल है। नो-एंट्री में बड़े वाहन प्रवेश कर रहे हैं और किसी तरह की रोक-टोक दिखाई नहीं दे रही।
नो-एंट्री में बसों की एंट्री, कौन जिम्मेदार?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यात्री बसें भी बिना किसी डर के नियम तोड़ रही हैं। आमतौर पर ये नियम सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन यहां उनका पालन होता नजर नहीं आ रहा। यही वजह है कि स्थानीय लोग अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे गंभीर सवाल
शहर में चर्चा है कि अगर सख्ती हो, तो व्यवस्था सुधर सकती है। लेकिन फिलहाल हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप तो यहां तक है कि बिना किसी संरक्षण के इस तरह खुलेआम नियमों का उल्लंघन संभव ही नहीं। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है।
क्या हर दिन बढ़ रहा है हादसे का खतरा?
अब समझिए असली चिंता क्या है तेज रफ्तार बसें और भारी वाहन जब संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले चौराहों से गुजरते हैं, तो खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हालिया हादसा इसकी एक बड़ी मिसाल बन चुका है। ऐसे में यह डर बना हुआ है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो फिर कोई बड़ी घटना हो सकती है।
लगातार लापरवाही से लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। शहरवासियों का कहना है कि अगर दो युवकों की मौत के बाद भी सिस्टम नहीं जागा, तो फिर कब जागेगा? लोगों की मांग साफ है नो-एंट्री नियम का सख्ती से पालन कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।