लखनऊ। यूपी पंचायत चुनाव टलने के बाद उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को अस्थायी रूप से प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है। शुरुआत में इस फैसले को लेकर गांव स्तर पर राहत का माहौल था, लेकिन अब जारी नए आदेश ने उनकी कार्यशैली पर सख्ती बढ़ा दी है। प्रदेश में 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है। इसके साथ ही साफ निर्देश दिए गए हैं कि अब कोई भी नया विकास कार्य या फंड खर्च बिना जिलाधिकारी की अनुमति के नहीं किया जा सकेगा।
नए कामों पर सख्त नियंत्रण
नए शासनादेश के अनुसार ग्राम पंचायतों में कोई भी नया काम सीधे शुरू नहीं किया जा सकेगा। हर प्रस्ताव पहले जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिलाधिकारी को भेजना होगा। डीएम की मंजूरी के बाद ही काम आगे बढ़ेगा। यह व्यवस्था 27 मई से लागू मानी जा रही है।
पहले से स्वीकृत कामों पर राहत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पहले से मंजूर या चल रहे विकास कार्यों पर रोक नहीं लगेगी। निर्माण कार्य, मरम्मत और पूर्ण हो चुके कामों का भुगतान पहले की तरह ही किया जाएगा। इसके लिए तकनीकी और भौतिक जांच की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
प्रशासक व्यवस्था में अलग प्रावधान
जहां ग्राम पंचायत में प्रशासनिक समिति पहले से काम कर रही है या प्रधान का पद खाली है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक नियुक्त किया गया है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रखना है।
हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती
इस पूरे मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि इस फैसले से पंचायत चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद अगली तारीख 22 जून तय की है और याचिकाकर्ताओं को संशोधन के लिए समय दिया गया है।