प्रदेश में गांधी प्राणी उद्यान अब सफेद टाइगरों की पैदाइश का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। मादा टाइगर ‘मीरा’ द्वारा एक सफेद टाइगर समेत तीन शावकों को जन्म देने के बाद यहां टाइगरों की कुल संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इनमें 4 सफेद और 6 रॉयल बंगाल टाइगर शामिल हैं। कुल संख्या में 4 नर, 3 मादा और 3 नवजात शावक हैं। सफेद टाइगरों की लगातार हो रही पैदाइश ग्वालियर को प्रदेश में अलग पहचान दे रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक सफेद टाइगर दुर्लभ होते हैं और इनका सफल प्रजनन बेहतर देखभाल, अनुकूल वातावरण और वैज्ञानिक प्रबंधन का परिणाम होता है।
अगर प्रदेश स्तर पर तुलना करें तो कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय, इंदौर में टाइगरों की संख्या 13 है, लेकिन इनमें सिर्फ 1 सफेद टाइगर है, जबकि एक काला और 11 पीले टाइगर शामिल हैं। यहां 6 शावक भी हैं, लेकिन सफेद टाइगरों की पैदाइश सीमित है। वहीं रीवा, जिसे कभी सफेद टाइगरों की धरती माना जाता था, वहां वर्तमान में सिर्फ दो सफेद और 5 पीले टाइगर ही मौजूद हैं। ऐसे में ग्वालियर चिड़ियाघर की उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पूरे विश्व में बाघों की कम होती संख्या सभी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यही वजह है कि विभिन्न देशों में बाघों के शिकार पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिए विश्व स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान में लगातार बाघों का कुनबा बढ़ रहा है।
भोपाल में एक भी नहीं, रीवा में दो, इंदौर में एक
प्रदेश के चार वन्य प्राणी उद्यानों में कुल 7 सफेद टाइगर हैं। इसमें से सर्वाधिक सफेद टाइगरों की संख्या गांधी प्राणी उद्यान, ग्वालियर में है। यहां कुल चार सफेद टाइगर हैं, जबकि रीवा में 2 और इंदौर में 1 सफेद टाइगर है। भोपाल की बात करें तो भोपाल में एक भी सफेद टाइगर नहीं है। रीवा में सफेद टाइगरों का प्रजनन नहीं हो रहा, बल्कि उन्हें कहीं और से लाया गया है। ग्वालियर में लगातार सफेद बाघों का प्रजनन होना बहुत बड़ी उपलब्धि है।
इंदौर में टाइगरों की संख्या है 13, इनमें एक सफेद
वर्ष 2010 में दिल्ली से आई थी मादा ‘जमुना’ यहां का मौसम सफेद टाइगरों को बहुत रास आया है। गांधी प्राणी उद्यान में वर्ष 2010 में नेशनल जूलॉजिकल पार्क, नई दिल्ली से सफेद टाइगर मादा ‘जमुना’ ग्वालियर लाई गई थी, तभी से चिड़ियाघर में संरक्षित बाघों के कुनबे में बढ़ोतरी हुई है। ‘जमुना’ ने सफेद बाघिन ‘मीरा’ को जन्म दिया था। इसके बाद यहां बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
वर्तमान में यहां बाघों का कुनबा इस प्रकार है:
टाइगर – रंग
सिंबा (नर) – पीला
तेजस (नर) – सफेद
लव (नर) – पीला
दुर्गा (मादा) – पीली
सुल्तान (नर) – सफेद
मीरा (मादा) – सफेद
सिद्धि (मादा) – पीली
नोट: मादा से जन्मे दो शावक पीले और एक शावक सफेद हैं (इनके लिंग की पहचान कुछ दिनों में कर ली जाएगी)।
1922 में बना था गांधी प्राणी उद्यान
ग्वालियर चिड़ियाघर की स्थापना 1922 में माधो राव सिंधिया द्वारा की गई थी। गांधी चिड़ियाघर में वास्तव में कई दुर्लभ प्रजातियों के जानवर मौजूद हैं। यह चिड़ियाघर परिवार के साथ घूमने के लिए एक सुखद जगह है, खासकर बच्चों के लिए। यह उन लोगों के लिए भी एक आकर्षक जगह है जो शहर में वन्यजीवों को देखना चाहते हैं। यहां आपको सफेद बाघ जैसी दुर्लभ और संरक्षित प्रजातियां देखने को मिलेंगी।
चिड़ियाघर में टाइगरों का कुनबा
चिड़ियाघर में वर्ष 2023 में मादा टाइगर ‘दुर्गा’ ने दो शावकों को जन्म दिया था। इसके बाद 28 जून 2024 की मध्य रात्रि में भी ‘दुर्गा’ ने तीन शावकों को जन्म दिया। 15 अगस्त 2024 को ‘मीरा’ ने भी तीन शावकों को जन्म दिया था। उसके बाद लगभग 20 महीने बाद मादा ‘मीरा’ ने फिर से तीन शावकों को जन्म दिया है।
बच्चों को लेकर काफी संवेदनशील है ‘मीरा’
रविवार को जिन तीन शावकों को ‘मीरा’ ने जन्म दिया है, वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। ‘मीरा’ अपने शावकों को लेकर पूरी तरह संवेदनशील रहती है। वह अपने पास किसी को भी नहीं आने देती। साथ ही जगह बदलने पर पहले शावकों को लेकर जाती है। चिड़ियाघर के कर्मचारी भी कहते हैं कि ‘मीरा’ शावकों के प्रति काफी गंभीर रहती है।
सकारात्मक संकेत
जिस तरह से सफेद टाइगरों की ब्रीडिंग हो रही है, वह न केवल संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत है, बल्कि भविष्य में इसे प्रदेश का व्हाइट टाइगर हब भी बना सकता है।
-डॉ. उपेन्द्र यादव, चिड़ियाघर प्रभारी