भारत का कपास क्रांति

सफेद सोना, नया सवेरा

भारत कपास उत्पादन में अग्रणी है, जिसे 'सफेद सोना' कहा जाता है। नवीन तकनीकों और सतत विकास की ओर बढ़ रहा है।

By : नरेंद्र कुमार
सफेद सोना, नया सवेरा

प्रत्येक वर्ष 7 अक्टूबर को मनाया जाने वाला ‘विश्व कपास दिवस’ हमें याद दिलाता है कि किसी राष्ट्र के भविष्य के मजबूत धागे उसके अतीत की ताकत से बुने जाते हैं। हजारों वर्षों से भारत में कपास की कताई और बुनाई होती रही है। भारतीय मलमल को अपनी उत्कृष्टता के कारण ‘हवा से बुना वस्त्र’ कहा जाता था। कपास हमारे लिए केवल व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि सभ्यता, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग है।

आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है और कपास की खेती के क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व में पहले स्थान पर है। लगभग 115.25 लाख हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती होती है, जो वैश्विक कपास रकबे के एक-तिहाई से अधिक है। भारत विश्व का एकमात्र देश है, जहाँ कपास की चारों प्रजातियों की व्यावसायिक खेती होती है। लगभग 60 लाख किसान प्रत्यक्ष रूप से इस फसल पर निर्भर हैं, जबकि लाखों अन्य लोग ओटाई, कताई, बुनाई और परिधान निर्माण से जुड़े हैं।

कपास भारत का ‘सफेद सोना’ है, जो आजीविका, औद्योगिक मजबूती और ग्रामीण समृद्धि का आधार है। देश की कुल वस्त्र-रेशा खपत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह करीब 30 प्रतिशत है। यह हमारे कपड़ा तंत्र की व्यापकता को दर्शाता है और उत्पादकता, गुणवत्ता तथा किसानों की आय बढ़ाने की जिम्मेदारी भी निर्धारित करता है।

वर्षों से भारतीय कपास क्षेत्र कम उत्पादकता, वर्षा-आधारित खेती, मौसम और कीटों के जोखिम तथा आधुनिक तकनीकों तक असमान पहुँच जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण मूल्य शृंखला को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है। 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के परिव्यय वाला ‘कपास उत्पादकता मिशन-कपास क्रांति’ इसी दृष्टिकोण का परिणाम है। इसका लक्ष्य 2030-31 तक कपास लिंट की उत्पादकता 440 से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना और कुल उत्पादन 498 लाख गांठों तक पहुँचाना है। इसके अंतर्गत जलवायु-अनुकूल किस्मों, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक कृषि पद्धतियों और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जा रहा है।

किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 571 की गई है। ‘CotBiz’ और ‘BITS’ जैसी डिजिटल व्यवस्थाएँ कपास मूल्य शृंखला में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ा रही हैं। वहीं, ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ गुणवत्ता, प्रमाणीकरण और विशिष्ट पहचान के माध्यम से भारतीय कपास को वैश्विक बाजार में स्थापित करने का प्रयास है।

उत्पादकता और गुणवत्ता पर जोर

भारत में लगभग 60 प्रतिशत कपास वर्षा-आधारित क्षेत्रों में उगाया जाता है। इसलिए खेती को जलवायु के प्रति अधिक सक्षम बनाना और पैदावार बढ़ाना आवश्यक है। उन्नत किस्मों और सघन पौधरोपण प्रणाली (एचडीपीएस) को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पारंपरिक खेती में किसान प्रति एकड़ सामान्यतः 5-7 क्विंटल कपास पैदा करते हैं, जबकि एचडीपीएस से उत्पादन लगभग 12 क्विंटल तक पहुँच गया है। अब इसे 18 क्विंटल प्रति एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

अधिक उत्पादन के साथ बेहतर गुणवत्ता भी जरूरी है। वर्तमान में लिंट रिकवरी लगभग 32-33 प्रतिशत है। आधुनिक ओटाई मशीनों के उपयोग से इसे 35 प्रतिशत तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उच्च गुणवत्ता वाला भारतीय कपास वैश्विक बाजारों तक पहुँच सके। भारत की फाइबर आवश्यकता वर्तमान के लगभग 15 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2030 तक 23 मिलियन मीट्रिक टन होने का अनुमान है। केवल कपास इस मांग को पूरा नहीं कर सकता। नवीकरणीय, जैव-अपघटनीय और कम कार्बन उत्सर्जन वाली सामग्रियों की बढ़ती मांग भारत के लिए नए अवसर पैदा कर रही है।

आधुनिक रेशों से नई फाइबर अर्थव्यवस्था:भारत सदियों से प्राकृतिक रेशों का उपयोग करता रहा है, लेकिन उनकी पूरी क्षमता का दोहन नहीं हुआ है। अब कपास से आगे बढ़कर आधुनिक रेशों के अनुसंधान, विकास और व्यावसायीकरण पर ध्यान दिया जा रहा है। कपास उत्पादकता मिशन के अंतर्गत 300 करोड़ रुपये के सहयोग से किसानों, ग्रामीण उद्यमों और सतत विनिर्माण के लिए नए अवसर खोले जा रहे हैं। इसमें आक, अलसी, रेमी, सिसाल, सेमल, भांग, बाँस, केला, बिच्छू-बूटी और अनानास के पत्तों से प्राप्त रेशे शामिल हैं।

आक या मदार, जिसे मिल्कवीड भी कहा जाता है, एक संभावनाशील आधुनिक रेशा है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में 15-16 एकड़ में इसकी खेती का विस्तार हुआ है तथा लगभग 10,000 किलोग्राम रेशा प्राप्त किया गया है। इसका उपयोग इन्सुलेशन, पर्यावरण-अनुकूल भराव सामग्री और अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले रक्षा वस्त्रों में हो सकता है।सिसाल का उपयोग वाहन उद्योग, निर्माण सामग्री और टिकाऊ पैकेजिंग में किया जा सकता है, जबकि रेमी से परिधान, डेनिम मिश्रण और तकनीकी वस्त्र बनाए जा सकते हैं। अनानास के पत्तों का रेशा कृषि अवशेषों को फैशन वस्त्रों, चमड़े के विकल्पों और जैव-मिश्रित सामग्रियों में बदल सकता है। केले के रेशे से सूत, कागज, हस्तशिल्प और तकनीकी वस्त्र बनाए जाते हैं। बाँस, अलसी, भांग, बिच्छू-बूटी और सेमल भी सतत वस्त्रों तथा तकनीकी उत्पादों के लिए नई संभावनाएँ खोलते हैं।यह विविधता भारत के लिए एक रणनीतिक आर्थिक संपदा है। वैश्विक बाजार में पर्यावरण-अनुकूल, नवीकरणीय और जैव-अपघटनीय सामग्रियों की बढ़ती मांग इन रेशों का महत्व बढ़ाएगी।

कपास की मातृभूमि भारत आज अपनी विरासत को भविष्य की आवश्यकताओं से जोड़ने के लिए तैयार है। हमारा लक्ष्य केवल कपास का संरक्षण करना नहीं, बल्कि आधुनिक रेशों, सतत सामग्रियों, नवाचार और उन्नत तकनीक के माध्यम से दूसरी फाइबर क्रांति का नेतृत्व करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5एफ विजन खेत से फाइबर, फाइबर से फैक्टरी, फैक्टरी से फैशन और फैशन से विदेशी बाजार के मार्गदर्शन में हम अपनी विरासत को वैश्विक आवश्यकताओं से जोड़ रहे हैं। स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के अनुकूल धागों की तलाश कर रही दुनिया में भारत वैश्विक कपड़ा उद्योग के अगले अध्याय को आकार देने के लिए तैयार है।

(लेखक केंद्रीय वस्त्र मंत्री हैं।)

संबंधित सामग्री

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदनों से भी यह मांग ज्यादा है।

Nov 03, 2026
TOP Universities: क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027: आईआईटी दिल्ली भारत में टॉप पर, पर छह शीर्ष संस्थानों की रैंक गिरी

TOP Universities: क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027: आईआईटी दिल्ली भारत में टॉप पर, पर छह शीर्ष संस्थानों की रैंक गिरी

क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027 में भारत के 325 संस्थान शामिल हैं। आईआईटी दिल्ली 66वीं रैंक के साथ देश में पहले नंबर पर है, लेकिन भारत के सभी छह टॉप संस्थानों की रैंक गिरी।

Nov 03, 2026
भारत ने पहली बार एक लॉन्चर से दो मिसाइलें दागीं, 500 किलोमीटर दूर 2 टारगेट तबाह, टेस्ट सफल

भारत ने पहली बार एक लॉन्चर से दो मिसाइलें दागीं, 500 किलोमीटर दूर 2 टारगेट तबाह, टेस्ट सफल

भारत की स्वदेशी प्रलय मिसाइल एक ही लॉन्चर से लगातार दो मिसाइलें दागने की क्षमता दिखा चुकी है। जानिए इसकी मारक क्षमता और खासियत।

Nov 03, 2026
India Batting Order: भारत का वनडे बैटिंग ऑर्डर तय, टॉप 4 में गिल रोहित-कोहली और श्रेयस अय्यर, राहुल का बड़ा रोल

India Batting Order: भारत का वनडे बैटिंग ऑर्डर तय, टॉप 4 में गिल रोहित-कोहली और श्रेयस अय्यर, राहुल का बड़ा रोल

गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले बैटिंग ऑर्डर बताया। टॉप 4 तय हैं, पांचवें और छठे नंबर पर राहुल और अक्षर को हालात देखकर उतारा जाएगा।

Nov 03, 2026
ओमान के पास भारतीय जहाज पर हमला, गुजरात के नाविक की मौत; 13 लोगों को बचाया गया

ओमान के पास भारतीय जहाज पर हमला, गुजरात के नाविक की मौत; 13 लोगों को बचाया गया

ओमान के तट के पास भारतीय झंडे वाले जहाज MSV Al Jusufi पर अज्ञात हवाई वस्तु से हमला हुआ। गुजरात के एक नाविक की मौत हो गई, जबकि 13 भारतीयों को बचा लिया गया।<br/><br/>

Nov 03, 2026