अनुराग तागड़े
बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर पाकिस्तान के खिलाफ भारत की 64 रन की शानदार जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने एक ऐसा बयान दिया जिसने क्रिकेट जगत के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा छेड़ दी।
प्लेयर ऑफ द मैच चुनी गई दीप्ति शर्मा ने मैच के बाद कहा, "सारा श्रेय टीम को जाता है और मैं बहुत आभारी हूं, हनुमान जी महान हैं।" यह बयान उस समय आया जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने टी-20 विश्व कप करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 10 रन देकर 5 विकेट झटके और भारत की जीत की सबसे बड़ी नायिका बनीं।
दीप्ति का यह प्रदर्शन केवल एक शानदार गेंदबाजी स्पैल नहीं था, बल्कि रिकॉर्ड बुक में दर्ज होने वाला प्रदर्शन था। उनकी घातक ऑफ स्पिन के सामने पाकिस्तान की बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई और भारत ने विश्व कप अभियान की शुरुआत दमदार अंदाज में की। इस प्रदर्शन के साथ दीप्ति महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाली गेंदबाजों में भी शीर्ष स्थान पर पहुंच गईं।
खेल और धर्म के संबंध पर लंबे समय से बहस होती रही है। सामान्यतः खेल को धर्म, राजनीति और अन्य विभाजक विषयों से अलग रखने की बात कही जाती है। लेकिन दुनिया भर के खिलाड़ी अपनी व्यक्तिगत आस्था और विश्वास को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते रहे हैं। फुटबॉल, टेनिस, एथलेटिक्स और क्रिकेट में अनेक खिलाड़ी जीत के बाद ईश्वर का धन्यवाद करते हैं, प्रार्थना करते हैं या अपने धार्मिक प्रतीकों को प्रदर्शित करते हैं।
दीप्ति शर्मा का बयान भी इसी श्रेणी में देखा जा रहा है। उन्होंने किसी प्रतिद्वंद्वी या समुदाय के विरुद्ध कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि अपनी सफलता का श्रेय अपनी व्यक्तिगत श्रद्धा को दिया। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में भारतीय प्रशंसकों ने इसे भारतीय सांस्कृतिक आत्मविश्वास और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का प्रतीक बताया।
भारत और पाकिस्तान के मुकाबले हमेशा केवल खेल नहीं होते। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण हर मैच करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ विश्व कप मंच पर भारत की एक प्रमुख खिलाड़ी द्वारा अपनी आस्था का सार्वजनिक उल्लेख स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गया।
दिलचस्प बात यह है कि भारतीय क्रिकेट में अपनी धार्मिक पहचान या आस्था व्यक्त करना कोई नई बात नहीं है। अतीत में कई भारतीय खिलाड़ियों ने मंदिरों में दर्शन किए हैं, पूजा-अर्चना की है या अपनी सफलता का श्रेय ईश्वर को दिया है। इसी प्रकार पाकिस्तान सहित दुनिया के अन्य देशों के खिलाड़ी भी अक्सर अपनी धार्मिक मान्यताओं का सार्वजनिक रूप से उल्लेख करते रहे हैं।
हालांकि खेल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी खिलाड़ी का मूल्यांकन उसकी आस्था से नहीं बल्कि उसके प्रदर्शन से होना चाहिए। और यदि प्रदर्शन की बात करें तो एजबेस्टन में दीप्ति शर्मा का प्रदर्शन किसी भी चर्चा से ऊपर था। 5 विकेट लेकर उन्होंने अकेले दम पर पाकिस्तान की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी और भारत को टूर्नामेंट में शानदार शुरुआत दिलाई।
आज जब महिला क्रिकेट अभूतपूर्व लोकप्रियता हासिल कर रहा है और भारत-पाकिस्तान मुकाबले विश्व क्रिकेट के सबसे चर्चित आयोजनों में शामिल हो चुके हैं, तब दीप्ति शर्मा का यह बयान और उनका प्रदर्शन दोनों लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। एक ओर मैदान पर उनका रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन था, तो दूसरी ओर अपनी सफलता के पीछे आस्था के प्रति उनका विनम्र स्वीकार।
एजबेस्टन की उस शाम भारत ने केवल पाकिस्तान को हराया नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट की बढ़ती शक्ति का भी प्रदर्शन किया। और उस जीत की सबसे चमकदार नायिका रहीं दीप्ति शर्मा, जिन्होंने अपने खेल से रिकॉर्ड बनाए और अपने शब्दों से करोड़ों भारतीयों का ध्यान आकर्षित किया।