बुराई रूपी रावण पर पुरुषोत्तम राम की जीत है दीपावली

बुराई रूपी रावण पर पुरुषोत्तम राम की जीत है दीपावली

डॉ. अमरनाथ पाठक

By : Swadesh Digital
बुराई रूपी रावण पर पुरुषोत्तम राम की जीत है  दीपावली

राजा राम के पुरुषार्थ का प्रकाश पर्व, दीपावली, बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है. यह भगवान राम के 14 वर्ष का वनवास काटकर रावण का संहार कर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है.इस दौरान लोग घरों को दीये और रंगोली से सजाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, स्वादिष्ट भोजन बनाते हैं और मिठाइयों का आदान-प्रदान करते हैं. दीपावली पर, धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणेश की पूजा की जाती है. यह पर्व आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है और हमें अपने भीतर के अंधकार को दूर कर अच्छाई और ज्ञान का दीपक जलाने के लिए प्रेरित करता है.

दीपावली का महत्व और परंपराएँ

ऐतिहासिक और पौराणिक हैं: भगवान राम रावण को हराकर 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. लोगों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे, इसलिए इसे 'रोशनी का त्योहार' भी कहते हैं.

देवी-देवताओं की पूजा: इस दिन, समृद्धि की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा की जाती है. घरों को साफ और सजाकर उनका स्वागत किया जाता है.

सजावट और उत्सव: लोग अपने घरों को दीयों, मोमबत्तियों, रंगोली और अन्य सजावटों से रोशन करते हैं. यह पर्व परिवार और दोस्तों को एक साथ लाता है और खुशियाँ बाँटने का मौका देता है.

आध्यात्मिक और नैतिक संदेश: दीपावली हमें अंधकार, अज्ञानता और बुराई को दूर करने की प्रेरणा देती है.यह आत्म-जागरूकता और आध्यात्मिक ज्ञान का भी प्रतीक है, जो हमें भीतर से प्रकाशित होने के लिए प्रेरित करता है.

किन्तु पर्यावरण के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है.

प्रदूषण नियंत्रण आज की जरूरत है.पटाखों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले प्रदूषण के कारण, अब हरित और प्रदूषण-मुक्त दीपावली मनाने का महत्व बढ़ गया है.

हरित दिवाली: पटाखों और आतिशबाजी के हानिकारक प्रभावों को समझते हुए, पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अधिक जिम्मेदार तरीके से जश्न मनाना आवश्यक है.

अन्य धर्मों में दीपावली

जैन धर्म: इस दिन को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है.

सिख धर्म: यह गुरु हरगोविंद जी की स्वतंत्रता का प्रतीक है, जिन्हें जहांगीर ने कैद से रिहा किया था और जो अमृतसर में हुए 'दीपावली' के दिन रिहा हुए .

इस त्योहार को प्रकाश का पर्व भी कहा जाता है. यह त्योहार हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को सेलिब्रेट किया जाता है. दीवाली न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है.

दीपावली शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों 'दीप' अर्थात 'दिया' व 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' के मिश्रण से हुई है. दीपावली जिसे दिवाली भी कहते हैं उसे अन्य भाषाओं में अलग-अलग नामों से पुकार जाता है जैसे : दिपावली, दीवाली.

दीपावली की शाम को घर की साफ-सफाई के बाद मुख्य पूजा की तैयारी की जाती है. शुभ मुहूर्त में, एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी, महालक्ष्मी, और कुबेर जी को स्थापित किया जाता है.

चंद्रविहीन रात्रि, अमावस्या पर आता है. इस पर्व पर लक्ष्मी-गणेश कुबेर और हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना की जाती है कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आए. इस प्रकार

भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है प्रकाश पर्व दीपावली जो हमे असीम खुशी प्रदान करती है.






लेखक वरिष्ठ पत्रकार,साहित्यकार व फिल्म कलाकार हैं

संबंधित सामग्री

LPG Price Hike Diwali: दीवाली से पहले क्या महंगे हुए सिलेंडर के दाम? जानिए क्या हैं आज के रेट

LPG Price Hike Diwali: दीवाली से पहले क्या महंगे हुए सिलेंडर के दाम? जानिए क्या हैं आज के रेट

दीवाली से पहले रसोई गैस के दाम बढ़ गए है क्या? तो जानिए आज क्या सिलेंडर के रेट में कोई बड़ा बदलाव हुआ है। इतना ही नहीं कमर्शियल सिलेंडर के लेकर क्या अपडेट है।

Oct 25, 2026
Fuel Charge Hike: ईंधन शुल्क बढ़ा, दीपावली पर फ्लाइट का किराया दोगुना, मुंबई से 26 हजार रुपए देने होंगे

Fuel Charge Hike: ईंधन शुल्क बढ़ा, दीपावली पर फ्लाइट का किराया दोगुना, मुंबई से 26 हजार रुपए देने होंगे

दीपावली पर घर लौटने वालों को इस बार हवाई सफर महंगा पड़ेगा। इंडिगो ने घरेलू उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाया, मुंबई से ग्वालियर का किराया 26 हजार रुपए तक पहुंचा।

Oct 18, 2026
त्योहारी सीजन में रोडवेज और ट्रेनों में सीट की मारामारी, छठ पूजा के चलते यूपी बिहार की ट्रेनों में पैर धरने की भी जगह नहीं

त्योहारी सीजन में रोडवेज और ट्रेनों में सीट की मारामारी, छठ पूजा के चलते यूपी बिहार की ट्रेनों में पैर धरने की भी जगह नहीं

दीपावली के त्योहार पर रोडवेज बसों के साथ ही रेलवे और प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। जयपुर जंक्शन पर ट्रेनों के रिजर्वेशन कोच में भी पांव रखने की जगह नहीं मिल रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को हो रही है। जनरल कोच में सफर करना भी बड़ी चुनौती है। छठ पूजा के चलते यूपी बिहार की ट्रेनों में पैर धरने की भी जगह नहीं है। राजधानी जयपुर के सिंधी कैम्प बस अड्डे पर भी सामान्य और वोल्वो बसों में सीट को लेकर मारामारी है। जयपुर के अलावा जोधपुर, कोटा, भरतपुर, अजमेर सरीखे शहरों में भी बस अड्डों पर भीड़ के कारण यात्रियों का आवागमन सुलभ नहीं हो पा रहा है।

Nov 10, 2023