Emergency: Kailash Joshi’s Untold Struggle

आपातकाल की आपबीती: विधानसभा के दरवाजे से खींच ले गई पुलिस 

आपातकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी को विधानसभा गेट से पुलिस खींचकर ले गई थी। उनके परिवार ने भी संघर्ष और सामाजिक बहिष्कार झेला।

By : स्वदेश डेस्क
आपातकाल की आपबीती: विधानसभा के दरवाजे से खींच ले गई पुलिस 

देश में आपातकाल लागू हुआ तो विरोध की हर आवाज सत्ता की आंखों में खटकने लगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ से जुड़े अनेक नेता गिरफ्तार कर लिए गए, जबकि कई भूमिगत हो गए। तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष कैलाश जोशी भी पुलिस से बचते हुए भूमिगत जीवन जी रहे थे।

लेकिन दिसंबर 1975 में विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया। हमेशा धोती-कुर्ता पहनने वाले कैलाश जोशी इस बार पेट-शर्ट पहनकर विधानसभा पहुंचे ताकि पहचान में न आएं। जैसे ही वे प्रवेश द्वार तक पहुंचे, वहीं तैनात मार्शल ने पहचान पत्र मांगा।

कैलाश जोशी ने जेब से पहचान पत्र निकालकर सामने फेंका और तेजी से विधानसभा के भीतर भागने का प्रयास किया। यदि वे सदन के भीतर पहुंच जाते, तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती थी। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें दबोच लिया। इसके बाद पहले उन्हें धार जेल ले जाया गया और फिर मौसा के तहत इंदौर जेल भेज दिया गया।

स्वर्गीय कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी बताते हैं कि आपातकाल का वह दौर पूरे परिवार के लिए कठिन परीक्षा जैसा था। पिताजी जेल चले गए तो घर और आंदोलन, दोनों की जिम्मेदारी मां स्वर्गीय तारादेवी जोशी ने संभाली।

दीपक जोशी बताते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल, कैलाश जोशी के साथ साथ उनकी माता का भी सम्मान करते थे। उन्होंने अधिकारियों से कह रखा था कि यदि तारादेवी जोशी किसी कार्यकर्ता की मदद के लिए आएं तो सहयोग किया जाए। पांचवीं तक पढ़ी होने के बावजूद उन्होंने जेल में बंद अनेक कार्यकर्ताओं के लिए पैरोल और जमानत दिलाने का काम संभाला।

धीरे-धीरे घर सहायता केंद्र बन गया। रोज बड़ी संख्या में लोग मदद की उम्मीद लेकर पहुंचते। तारादेवी स्वयं आवेदन लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय जाती और पीड़ित परिवारों की सहायता करवातीं। हालात ऐसे हो गए कि बाद में कई आपराधिक मामलों में बंद लोगों के परिजन भी पैरोल की गुहार लेकर उनके पास आने लगे। दीपक जोशी बताते हैं कि कुख्यात डाकू मोहर सिंह और माधौ सिंह के परिवारजन भी सहायता मांगने पहुंचे थे। वे बताते हैं कि मां को संवेदनशीलता और संघर्ष देखकर कुशाभाऊ ठाकरे ने 1977 में उन्हें विधायक का टिकट देने तक की बात कही थी। आपातकाल की मार केवल कैलाश जोशी तक सीमित नहीं रही। उसका असर परिवार के बच्चों तक पर पड़ा। 

दीपक जोशी बताते हैं कि 1975 में आठवीं पास करने के बाद जब वे नौवीं में प्रवेश लेने पहुंचे तो भोपाल के किसी निजी या सरकारी स्कूल ने उन्हें दाखिला नहीं दिया। कारण केवल इतना था कि वे नेता प्रतिपक्ष कैलाश जोशी के पुत्र थे। उन्होंने आदर्श विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास की, लेकिन बाद में उन्हें अनुत्तीर्ण बताकर प्रवेश से मना कर दिया गया। आखिरकार संघ प्रचारक नर्मदा प्रसाद सोनी 'सुक्कू भैया' की चिट्टी लेकर वे सुभाष स्कूल पहुंचे। वहां शिक्षक जयनारायण यादव ने प्रवेश फार्म में पिता के स्थान पर स्वयं अपना नाम लिखकर उन्हें प्रवेश दिया।

दीपक जोशी बताते हैं कि बाद में जब उनके पिता मुख्यमंत्री बन गए, तब वही स्कूल प्रवेश देने को तैयार थे जिन्होंने पहले मना कर दिया था। लेकिन कैलाश जोशी ने कहा, 'विपत्ति में जिसने साथ दिया, उसे छोड़ना नहीं चाहिए।' इसी कारण इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने सुभाष स्कूल से ही पूरी की।

स्वर्गीय कैलाश जोशी को लोग यूं ही 'राजनीति का संत' नहीं कहते थे। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जब वे पहली बार बस से अपनी विधानसभा बागली पहुंचे तो कार्यकर्ता भावुक हो उठे। कार्यकर्ताओं ने उनके लिए कार खरीदने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि सहयोग केवल बड़े लोग नहीं, छोटे कार्यकर्ता भी करेंगे। एक, पांच और दस रुपये के कृपन छपवाए गए और उसी राशि से कार खरीदी गई। उसकी चाबी स्वयंअटलबिहारी वाजपेयी ने उन्हें सीपी थी। दीपक जोशी बताते हैं कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए भी उन्होंने सरकारी बंगला छोड़कर विधायक विश्राम गृह में रहना स्वीकार किया, ताकि वे अपने साथी विधायकों से दूर न रहें और उन्हें मिली सुविधाओं का उपयोग पूरी पार्टी कर सके। यही सादगी, संघर्ष और संवेदनशीलता कैलाश जोशी को भारतीय राजनीति में अलग पहचान देती है।

आपातकाल ने केवल नेताओं को जेल में नहीं डाला, उसने परिवारों की जिंदगी भी बदल दी।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय कैलाश जोशी का परिवार भी उस दौर की यातना का साक्षी बना। विधानसभा के बाहर गिरफ्तारी से लेकर बेटे को स्कूलों में प्रवेश न मिलने तक, यह कहानी केवल राजनीतिक संघर्ष की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संस्कार और आत्मसम्मान की भी है। यही कारण है कि वर्षों बाद भी कैलाश जोशी को लोग केवल राजनेता नहीं, बल्कि 'राजनीति का संत' कहकर याद करते हैं।




 

संबंधित सामग्री

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में 4 नवंबर को भाजपा की पदयात्रा निकलेगी। राजनाथ सिंह की जगह अब जेपी नड्डा इसका शुभारंभ करेंगे। अटल पथ पर तैयारियां तेज हैं।

Nov 03, 2026
MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

एमपी के सरकारी कॉलेजों में 2004 और 2005 में भर्ती करीब 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका है। प्राध्यापक संघ ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जल्द निपटारा मांगा है।

Nov 03, 2026
संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

आरएसएस ने स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उन्हें याद किया। इंदौर बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बयान जारी किया।

Nov 03, 2026
वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदनों से भी यह मांग ज्यादा है।

Nov 03, 2026
Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

जांजगीर में सीबीआई अफसर बनकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने और 32 लाख ठगने के मामले में पुलिस ने इंदौर से दो आरोपी पकड़े हैं। एक आरोपी पहले पंजाब से पकड़ाया था।

Nov 03, 2026