Emergency Story: Herbal Mitti and Democracy Fight

आपातकाल की आपबीती: जब मिट्टी बेचते हुए बचाया गया लोकतंत्र

आपातकाल के दौरान भोपाल के अरुण कुलकर्णी ने ‘हर्बल मिट्टी’ बेचकर गुप्त संदेश पहुंचाए और लोकतंत्र की लड़ाई को जीवित रखा। जानिए उनकी कहानी।

By : स्वदेश डेस्क
आपातकाल की आपबीती: जब मिट्टी बेचते हुए बचाया गया लोकतंत्र

विनोद दुबे

भोपाल। आपातकाल के दौरान दमन का माहौल इतना कड़ा था कि खुलकर विरोध करना लगभग असंभव हो गया था। पुलिस की निगरानी हर गतिविधि पर थी, लेकिन इसके बावजूद संघ के स्वयंसेवक गुप्त रूप से संगठन और आंदोलन को जीवित रखे हुए थे। इन्हीं प्रयासों में एक अनोखा प्रयोग था, जिसमें अरुण कुलकर्णी जैसे स्वयंसेवक 'हर्बल मिट्टी' के सौदागर बनकर संदेशों का आदान-प्रदान करते थे।

अरुण कुलकर्णी उस समय युवा थे, निजी रूप से स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे और रविशंकर नगर में रहकर सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। उनका पूरा परिवार संघ कार्य के प्रति समर्पित था। प्रतिदिन शाखा जाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था और इसमें चूक होने पर बड़े भाई की फटकार भी सुननी पड़ती थी।आपातकाल की घोषणा के समय वे नागपुर से संघ सेवावर्ग द्वितीय वर्ष का प्रशिक्षण लेकर लौटे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वयंसेवकों को घर पर न रुकने की सलाह दी गई थी। ऐसे में संगठन के भीतर संदेश पहुंचाने के लिए उन्होंने श्रीराम अरावकर के साथ मिलकर 'हर्बल मिट्टी' बेचने का काम शुरू किया। यह केवल एक व्यापार नहीं था, बल्कि एक गुप्त माध्यम था, जिसके जरिए आंदोलन की रणनीति, तिथि और कार्यकर्ताओं की भूमिकाओं से जुड़ी जानकारी पहुंचाई जाती थी।

संघ के निर्देश पर सितंबर 1975 में पुराने शहर के चौक बाजार क्षेत्र में आंदोलन का निर्णय लिया गया। जुमेराती क्षेत्र के पास लालचंद दादवानी और सविता वाजपेयी के नेतृत्व में आंदोलन हुआ। जैसे ही विरोध शुरू हुआ, पुलिस ने पूरे क्षेत्र को छावनी में बदल दिया और श्रीराम अरावकर, अभय देव सहित कुल पांच कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, जिनमें अरुण कुलकर्णी भी शामिल थे।गिरफ्तारी से पहले उन्होंने परिवार को कोई सूचना नहीं दी थी। बाद में पुलिस ने घर पहुंचकर जानकारी दी और घर में तोड़फोड़ भी की। सामान फेंका गया और संघ से जुड़ी सामग्री की तलाश की गई। हालांकि संघ साहित्य पहले ही सुरक्षित स्थान पर रख दिया गया था, फिर भी डॉ हेडगेवार और गुरूजी की तस्वीरें पुलिस जब्त कर ले गई। पूरे आपातकाल के दौरान परिवार को बार-बार पूछताछ के लिए बुलाया जाता रहा, जिससे उन्हें भी मानसिक कष्ट झेलना पड़ा।

जेल में अरुण कुलकर्णी और उनके साथियों को धमकाया गया, उनसे जानकारी निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया। रात में उन्हें केन्द्रीय जेल भेज दिया गया। यह सभी के लिए पहला अनुभव था, जब उन्होंने जेल की सलाखें देखीं।जेल जीवन भी अपने आप में एक अनुभव था। वहां राजनीतिक बंदियों की दो श्रेणियां थीं। बी श्रेणी के बंदियों को सामान्य भोजन मिलता था, जबकि ए श्रेणी में अपेक्षाकृत बेहतर सुविधा थी।लेकिन संगठन के पदाधिकारियों ने समानता और समरसता का संदेश देते हुए दोनों श्रेणियों के भोजन को मिलाकर सभी के बीच समान रूप से बांटने का निर्णय लिया। यह कदम जेल के भीतर भी एकता और समानता का प्रतीक बना।

लगभग 18 महीने जेल में बिताने के बाद 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ और अरुण कुलकर्णी रिहा हुए। उन्हें जेल से रैली के रूप में निकाला गया। घर लौटकर वे कुछ दिन परिवार के साथ रहे, लेकिन जल्द ही उन्होंने स्वयं को पूर्ण रूप से संघ कार्य के लिए समर्पित कर दिया। केवल 21 वर्ष की आयु में उन्होंने प्रचारक के रूप में जीवन समर्पित कर दिया। इसके बाद उन्होंने बैतूल, राजगढ़, विदिशा सहित कई क्षेत्रों में जिला प्रचारक, विभाग प्रचारक और प्रांत स्तर के दायित्व निभाए। उनका जीवन संगठन, सेवा और समर्पण का उदाहरण बन गया। अरुण कुलकर्णी की यह कहानी बताती है कि आपातकाल के अंधेरे समय में भी कुछ लोग ऐसे थे, जिन्होंने न केवल साहस दिखाया, बल्कि अपनी सूझबूझ और समर्पण से लोकतंत्र की लौ को बुझने नहीं दिया।

आपातकाल का दौर केवल जेल और यातनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि यह गुप्त संघर्ष, साहस और संगठनात्मक कौशल की भी परीक्षा थी। ऐसे समय में जब हर गतिविधि पर नजर थी, कुछ स्वयंसेवक भूमिगत रहकर आंदोलन को जीवित रखे हुए थे। भोपाल के अरुण कुलकर्णी उन्हीं में से एक थे, जिन्होंने पुलिस से बचते हुए 'हर्बल मिट्टी' बेचने के बहाने संदेश पहुंचाकर लोकतंत्र की लड़ाई को आगे बढ़ाया।

 

संबंधित सामग्री

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में 4 नवंबर को भाजपा की पदयात्रा निकलेगी। राजनाथ सिंह की जगह अब जेपी नड्डा इसका शुभारंभ करेंगे। अटल पथ पर तैयारियां तेज हैं।

Nov 03, 2026
MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

एमपी के सरकारी कॉलेजों में 2004 और 2005 में भर्ती करीब 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका है। प्राध्यापक संघ ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जल्द निपटारा मांगा है।

Nov 03, 2026
संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

आरएसएस ने स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उन्हें याद किया। इंदौर बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बयान जारी किया।

Nov 03, 2026
वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदनों से भी यह मांग ज्यादा है।

Nov 03, 2026
Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

जांजगीर में सीबीआई अफसर बनकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने और 32 लाख ठगने के मामले में पुलिस ने इंदौर से दो आरोपी पकड़े हैं। एक आरोपी पहले पंजाब से पकड़ाया था।

Nov 03, 2026