Iran-US Tension Rises Over Hormuz Strait

ईरान-अमेरिका टकराव जारी: युद्धविराम पर सवाल

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। युद्धविराम के बावजूद नौसैनिक झड़पों ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

By : स्वदेश डेस्क
ईरान-अमेरिका टकराव जारी: युद्धविराम पर सवाल

प्रो. अंशु ओशी

इस सप्ताह अमेरिका और ईरान की सेनाएं होर्मुज जलडमरूमध्य में कई बार फिर आमने-सामने आ गईं, जबकि तथाकथित युद्धविराम अभी भी लागू माना जा रहा है। इस नए संघर्ष ने दुनियाभर में चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि दोनों देशों ने एक-दूसरे के नौसैनिक जहाजों, स्पीडबोटों और तटीय सुविधाओं पर हमले किए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग अधिकारों को लेकर नियंत्रित लेकिन लगातार तनाव बना हुआ है, और यह बढ़ता हुआ ही दिखाई देता है।फरवरी में ईरानी परमाणु स्थलों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी और इजराइली हमलों सहित तीव्र संघर्ष की अवधि के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल 2026 के अंत में युद्धविराम स्थापित किया गया था। ट्रम्प ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के हिस्से के रूप में इस समझौते की घोषणा की थी। इस पहल में जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना के एस्कॉर्ट की तैनाती शामिल थी, जिस पर ईरान ने फरवरी से आंशिक रूप से नाकेबंदी कर रखी है।

पिछले सप्ताह ट्रम्प ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया और इसे स्थायी शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया। साथ ही, उन्होंने ईरान को किसी भी हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी भी दी। हालांकि, इस घोषणा के बावजूद संघर्ष रुक नहीं सका।होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने पूरे जलडमरूमध्य पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर रखा है। वे टैंकरों पर चढ़कर या उन्हें डरा-धमकाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध हटाने तथा इजराइल के समर्थन को समाप्त करने का दबाव बना रहे हैं।युद्धविराम के बाद भी आईआरजीसी कमांडरों ने ईरान की अनुमति के बिना जलडमरूमध्य को प्रतिबंधित घोषित कर दिया है और वे अमेरिकी जहाजों की आवाजाही को घुसपैठ मान रहे हैं। ट्रम्प ने इस स्थिति को ईरान की तेल-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए “आर्थिक आत्मघाती मिशन” बताया है, हालांकि इससे ईरान वार्ता में अमेरिका के बराबर खड़ा दिखाई देता है।

शुरुआत से ही युद्धविराम किसी ठोस गारंटी से अधिक एक आकांक्षा जैसा रहा है। युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद ही होर्मुज को लेकर दोनों पक्षों के बीच झड़पें शुरू हो गईं और दोनों ने एक-दूसरे पर बुरे इरादों का आरोप लगाया। हालांकि ईरान पर बड़े जमीनी आक्रमण या हवाई हमले फिलहाल रुके हुए हैं, लेकिन होर्मुज क्षेत्र में छोटी नावों और ड्रोन से हमले जारी हैं। अमेरिका के बड़े नौसैनिक बेड़ों की मौजूदगी स्थिति को और अधिक गंभीर तथा घातक बना रही है।इस सप्ताह तनाव फिर तब बढ़ गया जब तीन अमेरिकी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस पॉल इग्नेशियस, यूएसएस स्युअंस और यूएसएस द सुलिवन्स  ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी की ओर जाते समय गोलीबारी की चपेट में आ गए। दूसरी ओर, ईरानी बलों ने जहाज-रोधी मिसाइलों, आत्मघाती ड्रोन और मशीनगनों से लैस तेज-रफ्तार हमलावर नौकाओं की बौछार कर दी।

इसके जवाब में अमेरिका के सेंटकॉम ने जलडमरूमध्य से सटे बंदर अब्बास और कश्म द्वीप स्थित आईआरजीसी ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए।ईरान ने इस घटनाक्रम को अलग तरीके से प्रस्तुत किया। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिकी विमानों और नौसैनिक जहाजों ने जलडमरूमध्य की ओर जा रहे एक ईरानी तेल टैंकर पर हमला कर शत्रुता भड़काई, जिसके बाद कश्म के पास नागरिक क्षेत्रों पर हवाई बमबारी की गई। ईरान का कहना है कि उसकी सेनाओं ने केवल आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की।आईआरजीसी ने अमेरिकी हमलों को युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन बताया और ट्रम्प पर युद्धविराम का फायदा उठाकर आक्रमण करने का आरोप लगाया। यह घटना पहले से बढ़े तनाव को और अधिक ज्वलनशील बनाने के लिए पर्याप्त थी।दोनों पक्ष अपनी-अपनी कार्रवाइयों को आत्मरक्षा का कदम बता रहे हैं। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने की बात कह रहा है, जबकि ईरान अपने क्षेत्रीय जल पर संप्रभुता का दावा कर रहा है। ट्रम्प की नीति में सैन्य शक्ति और कूटनीति दोनों शामिल हैं। उन्होंने क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ एक “ग्रैंड बार्गेन” प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें जलडमरूमध्य तक पहुंच के बदले प्रतिबंधों में राहत की बात कही गई है।

ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी बातचीत की इच्छा जताई है, बशर्ते अमेरिका के “साहसिक अभियान” समाप्त हों। हालांकि आईआरजीसी के भीतर कट्टरपंथी गुट अमेरिकी संकल्प को कमजोर करने के लिए बड़े हमले की वकालत कर रहे हैं। सामरिक दृष्टि से अमेरिका की नौसैनिक शक्ति, जो विमानवाहक पोत समूहों से लैस है, ईरान की क्षमताओं से कहीं अधिक मजबूत मानी जाती है। लेकिन ईरान की कम लागत वाली ड्रोन प्रणाली भी अमेरिका के खिलाफ प्रभावी साबित हुई है।ओमान और कतर जैसे तटस्थ देशों के माध्यम से कूटनीतिक रास्ते अभी भी खुले हुए हैं। सप्ताहांत की बैठकें युद्धविराम की सीमाओं को स्पष्ट कर सकती हैं। हालांकि ट्रम्प एक बड़े समझौते की दिशा में बढ़ना चाहते हैं, जिसमें जलमार्ग अधिकारों को परमाणु प्रतिबंधों से जोड़ा गया है। दूसरी ओर, ईरान पारस्परिकता की मांग कर रहा है और अमेरिकी सुरक्षा बलों की पूरी वापसी तक पीछे हटने से इनकार कर रहा है।

फिलहाल संघर्षविराम किसी तरह बना हुआ है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य एक बारूद के ढेर जैसा दिखाई देता है। सतह के नीचे युद्ध की आग सुलग रही है, जिसे केवल संवाद के सहारे टाला जा रहा है। लेकिन अगली चिंगारी कब बड़े युद्ध का रूप ले ले, यह कहना मुश्किल है।समाधान के लिए समझौता जरूरी है। अमेरिका को अपनी जिद छोड़नी होगी और ईरान को होर्मुज पर अपना कठोर रुख नरम करना होगा। तब तक दुनिया इस संकरे जलमार्ग से जुड़े संभावित भीषण संघर्ष को सांसें थामकर देखती रहेगी।

 

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