मिट्टी से मेडल: भारतीय महिलाएँ

मिट्टी से मेडल: नए भारत की ग्रामीण महिला शक्ति की उपलब्धियाँ

भारतीय ग्रामीण महिलाओं की खेल और पंचायती राज में बढ़ती भागीदारी, जो न केवल खेल उपलब्धियों तक सीमित है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रतीक है।

By : नरेंद्र कुमार
मिट्टी से मेडल: नए भारत की ग्रामीण महिला शक्ति की उपलब्धियाँ

मिट्टी से मेडल तक और पंचायत से पोडियम तक की यह यात्रा केवल खेल की कहानी नहीं है। यह उस ग्रामीण भारत की कहानी है, जहाँ महिला अब केवल विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की निर्माता बन रही है। खेल का पदक उसकी चमकती उपलब्धि है; खेत, घर, बाजार और पंचायत में बढ़ती उसकी भागीदारी नए भारत की स्थायी शक्ति है।

एशियाई खेल 2026 में भारतीय बेटियों की सफलता को केवल खेल उपलब्धियों के रूप में देखना इस बदलाव की व्यापकता को सीमित कर देना होगा। नागोया में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास के साथ पदक जीते, वह बदलते भारत की तस्वीर है, जहाँ बेटियाँ खेल के मैदान से लेकर पंचायत, खेत, उद्यम और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक अपनी पहचान बना रही हैं। खेलों का पोडियम इस परिवर्तन का दिखाई देने वाला चेहरा है, जबकि ग्रामीण भारत में महिलाओं की बढ़ती आर्थिक और सामाजिक भागीदारी इसकी गहरी बुनियाद है।

एशियाई खेलों में भारत ने 21 स्वर्ण सहित कुल 85 पदक जीते। इनमें बड़ी संख्या में पदक बेटियों के खाते में आए। भारत के कुल 85 पदकों में से 41 महिला खिलाड़ियों के खाते में आए। 21 स्वर्ण पदकों में से 11 महिलाओं ने जीते, जबकि तीन स्वर्ण मिश्रित स्पर्धाओं में आए। यह प्रदर्शन इसलिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें अनेक खिलाड़ी छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं।हरियाणा के संगतपुरा की 26 वर्षीय नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में भारत को इन खेलों का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण दिलाया। अमरावती की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ ने दो स्वर्ण और एक रजत जीतकर महिला रिकर्व में दक्षिण कोरिया के दो दशक पुराने वर्चस्व को चुनौती दी। उनकी उपलब्धि केवल एक युवा खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि उस संभावना का प्रतीक है, जो सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर भारत की बेटियों में छिपी है।

पृथिका प्रदीप ने दो स्वर्ण जीते और प्रणवी उर्स एशियाई खेलों में गोल्फ में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। प्राची चौधरी और विद्या रामराज ने 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण जीता। ट्रक चालक की बेटी विद्या, जो कभी नंगे पाँव दौड़कर अभ्यास करती थीं, ने पी.टी. उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ा। सीमा कुमारी ने 10,000 मीटर में 16 साल का पदक-सूखा खत्म किया। संजू देवी की कबड्डी टीम और इशिका चौधरी तथा सविता पूनिया की हॉकी टीम ने स्वर्ण जीता। महिला हॉकी ने 44 साल का इंतजार खत्म किया, जबकि हरमनप्रीत कौर की टीम ने क्रिकेट का स्वर्ण वापस दिलाया। शेफाली वर्मा और रेणुका सिंह ठाकुर जैसी छोटे शहरों से निकली खिलाड़ियों ने भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन उपलब्धियों के पीछे केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि संघर्ष भी है। लवलीना बोरगोहेन पेरिस के बाद मुक्केबाजी से दूर जाने के बारे में सोच चुकी थीं, लेकिन स्वर्ण के साथ लौटीं। डोपिंग प्रतिबंध के बाद लौटीं परवीन हुड्डा ने नागोया में स्वर्ण जीतकर अपने संघर्ष का नया अध्याय लिखा। मीराबाई चानू स्वर्ण से चूक गईं, लेकिन 49 किग्रा वर्ग में रजत जीतकर अपना एशियाई पदक संग्रह पूरा किया।कर्नाटक की 18 वर्षीय निशानेबाज तिलोत्तमा सेन की कहानी मानसिक संघर्ष की ओर भी ध्यान खींचती है। 15 वर्ष की उम्र में एशियाई चैंपियनशिप का रजत और पेरिस ओलंपिक का कोटा हासिल करने के बावजूद टीम में जगह न मिलने के बाद उन्हें मनोवैज्ञानिक सहयोग लेना पड़ा। नागोया का रजत उनके लिए केवल पदक नहीं, बल्कि निराशा से उबरकर वापसी का प्रतीक भी है। खेल व्यवस्था में मनोवैज्ञानिक परामर्श को नियमित प्रशिक्षण का हिस्सा बनाना इसी से जुड़ा एक महत्त्वपूर्ण सबक है।

लेकिन इन खिलाड़ियों की कहानियाँ हमें गाँव की उन हजारों बेटियों की ओर भी देखने को मजबूर करती हैं, जिनमें प्रतिभा तो है, पर अवसर नहीं। शहरों में अकादमी, प्रशिक्षक, पोषण और प्रतियोगिताएँ अपेक्षाकृत सुलभ हैं, जबकि ग्रामीण बेटी को कई किलोमीटर दूर जाकर अभ्यास करना पड़ सकता है। जिस परिवार के लिए धनुष, राइफल, अच्छे जूते या यात्रा का खर्च बड़ी चुनौती हो, वहाँ से किसी बेटी का अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुँचना असाधारण संकल्प का परिणाम है।यही प्रश्न खेल से आगे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में भी दिखाई देता है। खेत में काम करने वाली महिला, पशुपालन करने वाली महिला, स्वयं सहायता समूह चलाने वाली महिला, पंचायत प्रतिनिधि और छोटे व्यवसाय की संचालिका इन सभी की उपलब्धियाँ अक्सर पदक तालिका में दर्ज नहीं होतीं। फिर भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक परिवर्तन में उनका योगदान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

भारत के कृषि कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी अब 42 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। खेती, पशुपालन, जैविक कृषि, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे व्यवसायों में महिलाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्त्वपूर्ण शक्ति बन रही हैं। जिस तरह प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर खिलाड़ी पदक जीतती है, उसी तरह पूँजी, कौशल, तकनीक और बाजार मिलने पर ग्रामीण महिला परिवार और गाँव की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है।

ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण की दूसरी बड़ी तस्वीर पंचायती राज में दिखाई देती है। देश में 14.5 लाख से अधिक महिला निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का लगभग 46 प्रतिशत हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने मार्च 2025 में सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान शुरू किया। वर्ष 2025-26 में 7.18 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया और 32 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 744 आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायतें चिह्नित की गईं। पंचायतों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी ‘निर्भय रहो’ पहल भी शुरू की गई है।

स्थानीय लोकतंत्र में यह भागीदारी महत्त्वपूर्ण है, लेकिन प्रतिनिधित्व को वास्तविक नेतृत्व में बदलना अभी बाकी है। निर्वाचित महिला यदि पंचायत में केवल नाम की प्रतिनिधि रह जाए और निर्णय परिवार के अन्य सदस्य लें, तो राजनीतिक सशक्तीकरण अधूरा रहेगा। इसलिए महिला प्रतिनिधियों को ग्राम पंचायत विकास योजना, बजट, सरकारी योजनाओं, डिजिटल प्रशासन और वित्तीय प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देनी होगी।इस परिवर्तन में समाज और मीडिया की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण है। महिला की उपलब्धि को केवल संघर्ष और सहानुभूति की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि क्षमता और उत्कृष्टता की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए। कॉर्पोरेट जगत को महिला खेल, ग्रामीण उद्यम और महिला नेतृत्व में निवेश को सामाजिक दायित्व से आगे बढ़कर आर्थिक और सामाजिक निवेश के रूप में देखना होगा।

मिट्टी से मेडल तक और पंचायत से नेतृत्व तक की यह यात्रा केवल महिलाओं की उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के बदलते चरित्र की कहानी है। जब गाँव की महिला अपने श्रम का मूल्य, अपनी आय पर अधिकार, पंचायत में अपनी आवाज और अपनी बेटी के भविष्य पर निर्णय लेने का अधिकार हासिल करती है, तभी महिला सशक्तीकरण वास्तविक अर्थ ग्रहण करता है। खेल का पदक इस परिवर्तन की चमक है, लेकिन खेत, घर, बाजार और पंचायत में बढ़ती महिला भागीदारी ही इसकी स्थायी शक्ति है। यही नए भारत की ग्रामीण नारी शक्ति है।

बलकार सिंह पूनियाँ

(लेखक सहायक प्रोफेसर, ग्रामीण विकास विभाग, इग्नू, नई दिल्ली हैं।)

संबंधित सामग्री

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदनों से भी यह मांग ज्यादा है।

Nov 03, 2026
TOP Universities: क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027: आईआईटी दिल्ली भारत में टॉप पर, पर छह शीर्ष संस्थानों की रैंक गिरी

TOP Universities: क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027: आईआईटी दिल्ली भारत में टॉप पर, पर छह शीर्ष संस्थानों की रैंक गिरी

क्यूएस एशिया रैंकिंग 2027 में भारत के 325 संस्थान शामिल हैं। आईआईटी दिल्ली 66वीं रैंक के साथ देश में पहले नंबर पर है, लेकिन भारत के सभी छह टॉप संस्थानों की रैंक गिरी।

Nov 03, 2026
भारत ने पहली बार एक लॉन्चर से दो मिसाइलें दागीं, 500 किलोमीटर दूर 2 टारगेट तबाह, टेस्ट सफल

भारत ने पहली बार एक लॉन्चर से दो मिसाइलें दागीं, 500 किलोमीटर दूर 2 टारगेट तबाह, टेस्ट सफल

भारत की स्वदेशी प्रलय मिसाइल एक ही लॉन्चर से लगातार दो मिसाइलें दागने की क्षमता दिखा चुकी है। जानिए इसकी मारक क्षमता और खासियत।

Nov 03, 2026
India Batting Order: भारत का वनडे बैटिंग ऑर्डर तय, टॉप 4 में गिल रोहित-कोहली और श्रेयस अय्यर, राहुल का बड़ा रोल

India Batting Order: भारत का वनडे बैटिंग ऑर्डर तय, टॉप 4 में गिल रोहित-कोहली और श्रेयस अय्यर, राहुल का बड़ा रोल

गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से पहले बैटिंग ऑर्डर बताया। टॉप 4 तय हैं, पांचवें और छठे नंबर पर राहुल और अक्षर को हालात देखकर उतारा जाएगा।

Nov 03, 2026
ओमान के पास भारतीय जहाज पर हमला, गुजरात के नाविक की मौत; 13 लोगों को बचाया गया

ओमान के पास भारतीय जहाज पर हमला, गुजरात के नाविक की मौत; 13 लोगों को बचाया गया

ओमान के तट के पास भारतीय झंडे वाले जहाज MSV Al Jusufi पर अज्ञात हवाई वस्तु से हमला हुआ। गुजरात के एक नाविक की मौत हो गई, जबकि 13 भारतीयों को बचा लिया गया।<br/><br/>

Nov 03, 2026