Monalisa Case Raises Questions on Social Media Rol

सोशल मीडिया और कन्वर्जन: मोनालिसा व मंदिर में फोटो सेशन एजेंडा ?

मोनालिसा मामले में सोशल मीडिया, कथित विवाह और जांच को लेकर कई सवाल उठे हैं। राष्ट्रीय जनजातीय आयोग ने मामले में जांच तेज कर दी है।

By : स्वदेश डेस्क
सोशल मीडिया और कन्वर्जन: मोनालिसा व मंदिर में फोटो सेशन एजेंडा ?

विवेक कुमार पाठक

राष्ट्रीय जनजातीय आयोग की तत्परता से की गई जांच में असली केरल स्टोरी के रूप में महिमा मंडित किए गए मोनालिसा और फरमान की कथित शादी का असल खुलासा परत दर परत देश के सामने आ रहा है। झूठे जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाकर शादी का षड़यंत्र रचने वाले यूपी के आरोपी युवक फरमान पर मप्र के महेश्वर थाने में मामला दर्ज होते ही पूरा मामला फिर चर्चा में है। नाबालिग जनजाति युवती मोनालिसा को अपने एजेंडे के लिए केरल के मंदिर में फोटोशूट कराने वाले फरमान पर एससी एसटी एक्ट एवं पोक्सो एक्ट के तहत जांच व कार्रवाई जारी है। खुलासे कुछ इस तरह हो रहे हैं कि राष्ट्रीय जनजातीय आयोग ने केरल एवं मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों को 22 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से नई दिल्ली आयोग मुख्यालय तलब किया है। 

मोनालिसा के जनजातीय परिवार ने सवाल खड़े किए हैं कि उनकी फूल बेचने वाली गांव की नाबालिग बेटी मोनालिसा को फरमान पूरे देश के सामने भ्रमित करता रहा मध्य प्रदेश और केरल की पुलिस सिर्फ तमाशा देखते रही। मीडिया में चौतरफा चर्चा है कि मध्य प्रदेश के पारधी जनजाति की इस लड़की को केरल ले जाने की मानव तस्करी एवं अंतर्राष्ट्रीय फडिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है। मित्रों बीते दिनों पूरे देश ने देखा कि कैसे सोशल मीडिया की चकाचौंध से सामने आयी कथित मोनालिसा केरल में शादी करती है। इसे शादी या निकाह कहा जाए इसका किसी कोई अता पता नहीं है। जगह केरल चुनी जाती है और मुस्लिम युवक फरमान मंदिर में जीत की घोषणा सा करता फोटो सेशन करा रहा है। मुस्लिम बने रहकर मंदिर में विवाह को प्रचारित करना क्या समझा जाए। प्रायोजित खबरें बस उतनी बात बताती रहीं जितना फरमान का कथित उदार चेहरा मोनालिसा जैसी लड़कियों की स्मृति में दर्ज किया जा सके। सबसे बड़ा संदेश विवाह की तस्वीर को रियल केरला स्टोरी बताते हुए दिया गया।

वास्तव में मोनालिसा के साथ जो हुआ है वो कन्वर्जन के जुनून का हाल-ए-केरला ही है। हम जानते हैं कि कैसे कुंभ मेले में फूल बेचने वाली लड़की को सोशल मीडिया पर तैनात देश के दिशाहीन बेरोजगारों ने भरपूर पहचान दिलाई। इस पहचान के कारण कुंभ के कई गहरे आध्यात्मिक पक्ष मीडिया और सोशल मीडिया में स्थान के लिए तरसते रहे। लोगों ने मोनालिसा एवं उस जैसी फटाफट प्रसिद्धि पाई नकली जटायें लगाने वाली हर्षा रिछारिया को भी बिग बॉस की तरह देखा। असल में तो बिग बॉस जैसे शो दर्शकों का यही स्तर बनाने के लिए बनते हैं। सनसनी, विवाद, तड़क भड़क ही जब दर्शक का मिजाज बना दिया जाए तो फिर फूल बेचने वाली लड़की नियंत्रणविहीन सफलता की ओर अग्रसर हो जाती है आगे फिर कहां किस जगह पहुंच जाए कोई समझ नहीं। 

मप्र के खरगोन जिले के महेश्वर की रहने वाली यह लड़की मोनालिसा बनकर मुबई फिल्म करने गयी थी मगर एक साल से पहले ही वह मुस्लिम फरमान से मंदिर परिसर में छद्म एक्टिंग केरल जाकर कर रही है। सवाल उठता है कि पारधी बंजारा समुदाय की 18 वर्ष की इस लड़की को विवाह के लिए केरल ही क्यों ले जाया गया। मुस्लिम युवक तो उत्तरप्रदेश के बागबत का है फिर यूपी के अयोध्या में विवाह का विचार क्यों नहीं आया। सवाल यह भी कि युवक क्या हिन्दू बन चुका है जिससे उसने कथित हिन्दू विवाह किया है। यह शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की गई है तो फिर इसका हवाला क्यों नहीं दिया गया, आगे निकाह करके मोनालिसा को कबूल है कबूल है कबूल है बोलना पड़ेगा अथवा वह केरल के इस मंदिर में ही आगे पति के हिंदू धर्म को अपनाने की साक्षी बनती क्या, इस तरह के कई सवालों के जवाब मंदिर में कथित विवाह या निकाह के समय ही संकेतों में दे दिए गए थे। 

मुस्लिम युवक के परिजन द रियल केरला स्टोरी के चित्र की भेंट में काफी बातें बिना शब्दों के कह गए थे। एजेंडाशुदा शादी के लिए मोनालिसा के फर्जी एवं झूठे जन्म प्रमाणपत्र ने फरमान व उसे मदद करने वाली केरल की पूरी गैंग और उसके परिवार व पोषकों की पोल खोलकर रख दी है। दरअसल सेकुलरवाद के नाम पर केरल में दशकों से कन्वर्जन का यही असल चेहरा है। यहां मंदिरों का मजाक कोई नहीं बात नहीं है। मुस्लिम युवा ने बाद में जब मोनालिसा से निकाह करा होगा तो उसका फोटोसेशन पूरे भारत के मोबाइलों की स्क्रीन पर अब तक नहीं देखा गया।। युवक का हिन्दू युवती से विवाह के लिए उदार दिखना एक सुनियोजित षड़यंत्र का हिस्सा रहा है सो युवक फरमान ने पवित्र सनातनी मंदिर में बिना हिन्दू हुए विवाह का नाटक खेलने में कोई संकोच नहीं किया था। उसे पता था कि उसे एक दिन में करोड़ों लोग मंदिर में देख लेंगे और भारत भर की कई मोनालिसा इस उदारता के झांसे में अपने अवचेतन को लाने से न बच सकेंगी। असल बात तो यह है कि मंदिर में विवाह तो हिन्दू युवक युवतियों के बीच ही हो सकता है सो यह सनातन का विवाह तो था ही नहीं। यह निकाह नहीं है दिखाने का झूठा आवरण मंदिर के नाम पर किया गया जो सबसे ज्यादा चिंताजनक है।


 

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