RSS History in Harda: 1937 to 2025 Journey

संघ कार्य के 100 वर्ष: हरदा : 1937 में 10 युवकों के साथ शंकर मंदिर परिसर में शुरू हुई संघ की पहली शाखा

हरदा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास, 1937 से 2025 तक का सफर। जानें संघ के विस्तार, संघर्ष और प्रेरक प्रसंगों की पूरी कहानी।

By : स्वदेश डेस्क
संघ कार्य के 100 वर्ष: हरदा : 1937 में 10 युवकों के साथ शंकर मंदिर परिसर में शुरू हुई संघ की पहली शाखा

मध्यप्रदेश के हरदा जिले में म राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य 1937 में प्रारंभ हुआ। इस कार्य का शुभारंभ संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबा साहब आप्टे के हरदा प्रवास के दौरान हुआ। उनके आगमन पर एक स्थानीय कुलकर्णी परिवार के घर बैठक आयोजित की गई, जिसमें लगभग 10 युवक शामिल हुए। संघ के उद्देश्य और कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर उन्होंने सहयोग का संकल्प लिया और उसी दिन शंकर मंदिर परिसर में शाखा आरंभ कर दी गई। अनंतराम चौबे पहले संघचालक बने, बाद में यह दायित्व अप्पासाहेब परुळकर ने संभाला।

प्रारंभिक दौर में शाखा अनियमित रही, लेकिन 1936 के बाद भाऊ साहब भुस्कुटे के प्रयासों से कार्य में गति आई। उनके लगातार प्रवास और संगठनात्मक प्रयासों से हरदा में शाखाएं नियमित होने लगीं। 1945 तक हरदा नगर में तीन सायं, दो प्रभात और दो रात्रि शाखाएं संचालित होने लगीं, जिनमें लगभग 500 स्वयंसेवकों की उपस्थिति रहती थी। नगर के साथ-साथ टिमरनी, सिवनी मालवा, हण्डिया, शिवपुर, मानापुरा, भुन्नास, बालागांव और सोडलपुर सहित लगभग 15 स्थानों पर शाखाएं स्थापित हो गई। इस प्रकार हरदा में संघ का संगठनात्मक ढांचा मजबूत होता गया और ग्रामीण क्षेत्रों तक इसका विस्तार हुआ।

प्रतिबन्ध के दौरान 80 स्वयंसेवक गिरफ्तार हुए 1948 में संघ पर लगे प्रतिबंध के दौरान हरदा जिले के स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। लगभग 80 स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह कर गिरफ्तारी दी और प्रतिबंध का विरोध किया। टिमरनी में इस आंदोलन का नेतृत्व भाऊसाहब भुस्कुटे ने किया, जबकि हरदा में भास्करराव गद्रे ने इसकी कमान संभाली। यह काल संघ के लिए संघर्ष का समय था, लेकिन स्वयंसेवकों के साहस और प्रतिबद्धता ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाया।

संघ कार्यालय की स्थापना

कार्य के विस्तार के साथ हरदा में संघ कार्यालय की आवश्यकता महसूस हुई। प्रारंभ में भिकाजी बेलापुरकर ने अपना मकान निःशुल्क उपलब्ध कराया। बाद में विभिन्न स्थानों पर किराए के भवनों में कार्यालय संचालित होता रहा। अंततः 1964 में गूजर छात्रावास के सामने संघ का स्वयं का कार्यालय भवन निर्मित हुआ। इससे संगठन को स्थायित्व मिला और कार्य संचालन अधिक व्यवस्थित हुआ।

स्वयंसेवकों ने दिखाया अ‌द्भुत साहस

1975 के आपातकाल के दौरान भी हरदा के स्वयंसेवकों ने अ‌द्भुत साहस और समर्पण का परिचय दिया। टिमरनी के जैन समाज के दो भाइयों का प्रसंग विशेष रूप से उल्लेखनीय है। दोनों भाई सत्याग्रह कर जेल जाना चाहते थे, लेकिन परिवार और व्यापार की जिम्मेदारी के कारण एक को घर पर रहना आवश्यक था। इस पर दोनों में मतभेद हुआ, लेकिन अंततः संगठन के मार्गदर्शन से समाधान निकला। यह घटना स्वयंसेवकों की राष्ट्र और संगठन के प्रति निष्ठा को दर्शाती है, जहां व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर कर्तव्य को प्राथमिकता दी गई।

प्रेरक प्रसंग और व्यक्तित्व

हरदा के संघ कार्य में कई प्रेरक प्रसंग जुड़े हैं। छिपावड़ गांव में शिवदत्त दधीच ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से प्रेरणा लेकर गांव में शाखा शुरू की। भगवा ध्वज न मिलने पर उन्होंने सफेद साड़ी को गेरू से रंगकर ध्वज बनाया, जिस पर 'आरएसएस लिखा गया। यह उनकी निष्ठा और नवाचार का अद्भुत उदाहरण है। "इसी प्रकार भाऊसाहब भुस्कुटे का एक प्रसंग भी उल्लेखनीय है, जब उन्होंने एक सामान्य स्वयंसेवक से मिलने के लिए कठिन परिस्थितियों में पैदल गांव का दौरा किया। उनका यह व्यवहार स्वयंसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। एक अन्य प्रसंग में, एक स्वयंसेवक रमेश चंद्रवंशी ने केवल एम.एस. गोलवलकर (गुरुजी) के दर्शन के लिए पैदल इंदौर की यात्रा की। यह उनकी श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। हरदा जिले में संघ कार्य का इतिहास केवल संगठनात्मक विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि यह समर्पण, संघर्ष और प्रेरणा की गाथा है। प्रारंभिक कठिनाइयों, प्रतिबंधों और आपातकाल जैसी चुनौतियों के बावजूद स्वयंसेवकों ने संगठन को निरंतर आगे बढ़ाया। आज भी यह इतिहास नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

जिस ध्वज को देखते ही राष्ट्र का संपूर्ण इतिहास, संस्कृति एवं परंपरा हमारी आंखों के सामने खड़े हो जाते हैं, जिसे देखते ही हमारे हृदय की भावनाएं उमड़ पड़ती हैं, तथा हृदय में एक विशिष्ट स्फूर्ति का संचार हो जाता है ऐसे भगत ध्वज को हम अपना गुरु मानते हैं।

डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार



 

संबंधित सामग्री

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में कल BJP की लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ विशाल पदयात्रा, राजनाथ की जगह JP नड्डा करेंगे शुभारंभ

भोपाल में 4 नवंबर को भाजपा की पदयात्रा निकलेगी। राजनाथ सिंह की जगह अब जेपी नड्डा इसका शुभारंभ करेंगे। अटल पथ पर तैयारियां तेज हैं।

Nov 03, 2026
MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

MP Promotion Hold: एमपी के सरकारी कॉलेजों में 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका, तीन साल से फाइल लटकी

एमपी के सरकारी कॉलेजों में 2004 और 2005 में भर्ती करीब 500 सहायक प्राध्यापकों का प्रमोशन अटका है। प्राध्यापक संघ ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जल्द निपटारा मांगा है।

Nov 03, 2026
संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

संघ ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर किया याद, स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत को श्रद्धांजलि अर्पित की

आरएसएस ने स्वदेशी और सामाजिक सुधार के अग्रदूत राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उन्हें याद किया। इंदौर बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बयान जारी किया।

Nov 03, 2026
वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदन

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में भारत पाकिस्तान मैच के 34 हजार टिकटों के लिए 84 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं। फाइनल के 79 लाख आवेदनों से भी यह मांग ज्यादा है।

Nov 03, 2026
Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

Digital Arrest: जांजगीर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 32 लाख की ठगी, इंदौर से दो आरोपी गिरफ्तार

जांजगीर में सीबीआई अफसर बनकर बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट करने और 32 लाख ठगने के मामले में पुलिस ने इंदौर से दो आरोपी पकड़े हैं। एक आरोपी पहले पंजाब से पकड़ाया था।

Nov 03, 2026