सिनेमा के जरिए समाज की पड़ताल

जब न्याय की प्रतीक्षा प्रतिशोध में बदल जाती है: दो फिल्मों के बहाने समाज के आक्रोश की पड़ताल 

कैलाश चन्द्र

By : स्वदेश डेस्क
जब न्याय की प्रतीक्षा प्रतिशोध में बदल जाती है: दो फिल्मों के बहाने समाज के आक्रोश की पड़ताल 

सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं होता। कई बार वह समाज के भीतर वर्षों से सुलग रहे आक्रोश, असुरक्षा, न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास और मानवीय संवेदनाओं को इस तरह पर्दे पर उतार देता है कि दर्शक केवल कहानी नहीं देखता, बल्कि स्वयं को उसके भीतर खड़ा हुआ महसूस करता है।

हाल में चर्चित फिल्म 'धुरंधर' और विवादों में रही 'Citizen Vigilante' इसी श्रेणी की फिल्में हैं। दोनों की पृष्ठभूमि अलग है, पात्र अलग हैं और सामाजिक संदर्भ भी भिन्न हैं, लेकिन एक प्रश्न दोनों के केंद्र में समान रूप से उपस्थित है यदि पीड़ित को न्याय मिलने की आशा समाप्त हो जाए, तो उसके भीतर जन्म लेने वाले प्रतिशोध को क्या केवल अपराध कहकर समझा जा सकता है?

पीड़ा की पराकाष्ठा और एक भाई का आक्रोश

'धुरंधर' में घटनाएँ उस समय निर्णायक मोड़ लेती हैं, जब एक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवार के गुंडे नायक जस्सी के परिवार को बर्बाद कर देते हैं। पिता की हत्या, बहनों पर अत्याचार और छोटी बहन का अपहरण इन घटनाओं के बाद जस्सी प्रतिशोध के मार्ग पर चल पड़ता है। फिल्म में हिंसा के अनेक दृश्य हैं, किंतु उनका उद्देश्य केवल रक्तपात दिखाना नहीं, बल्कि उस मानसिक स्थिति को उकेरना है जिसमें एक व्यक्ति अपने भीतर बची हुई समूची संवेदना खो बैठता है।

फिर भी फिल्म का सबसे मार्मिक क्षण हिंसा नहीं, बल्कि वह दृश्य है जब जस्सी अपनी बंधक बनाई गई छोटी बहन तक पहुँचता है। भाई को देखते ही बहन की दबाई हुई चीखें और टूटता हुआ साहस उस दर्द को व्यक्त कर देता है जिसे किसी संवाद की आवश्यकता नहीं होती।

इसी प्रकार अदालत से बाहर आने के बाद जस्सी का अपनी माँ से कहना "फौज में मरता तो शहीद कहलाता" और माँ का उसे गले लगाकर "मेरा फौजी बच्चा" कहना, फिल्म के सबसे भावनात्मक दृश्यों में शामिल हो जाता है। यह दृश्य बताता है कि कानून और समाज का निर्णय अपनी जगह है, लेकिन माँ की दृष्टि में उसका बेटा अब भी वही बच्चा है, जिसे उसने अपने संस्कारों के साथ बड़ा किया था।

जब व्यवस्था पर भरोसा टूटने लगे

दूसरी ओर, 'Citizen Vigilante' न्याय व्यवस्था से उपजी निराशा को एक अलग सामाजिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। कहानी एक नाबालिग पीड़िता के साथ हुए जघन्य यौन अपराध से आरम्भ होती है। न्यायालय द्वारा आरोपियों को सुधार का अवसर दिए जाने के बाद फिल्म का केंद्रीय पात्र स्वयं न्याय करने का मार्ग चुनता है।

फिल्म में वह केवल अपराधियों से ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और उनकी सोच से भी प्रश्न करता है। अपराध, सांस्कृतिक टकराव, प्रवासन, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषय कथा के माध्यम से सामने आते हैं। यद्यपि फिल्म का वैचारिक दृष्टिकोण अत्यंत स्पष्ट है और कई समीक्षकों ने इसे एकतरफा तथा विवादास्पद माना है, फिर भी यह पश्चिमी समाज के एक वर्ग में मौजूद उस असंतोष को अभिव्यक्त करती है, जो अपराध और न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बढ़ता दिखाई देता है।

सिनेमा का प्रश्न, समाज का उत्तर

इन दोनों फिल्मों की सबसे बड़ी समानता यह है कि इनके नायक स्वयं को व्यवस्था द्वारा असहाय महसूस करते हैं। जब संस्थाओं पर विश्वास कमजोर पड़ता है, तब प्रतिशोध उन्हें न्याय का विकल्प दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि दर्शक कई बार पात्रों के क्रोध को समझ तो लेता है, भले ही उनके तरीकों से सहमत न हो।

सिनेमा का कार्य केवल समाधान देना नहीं, बल्कि कठिन प्रश्नों को समाज के सामने रखना भी है। 'धुरंधर' और 'Citizen Vigilante' यही करती हैं। वे दर्शकों को यह सोचने के लिए विवश करती हैं कि न्याय केवल अदालतों का विषय नहीं, बल्कि समाज के नैतिक विश्वास का भी आधार है।

प्रतिशोध की कहानियाँ सदैव आकर्षित करती रही हैं, क्योंकि वे मनुष्य की सबसे तीव्र भावनाओं दर्द, अपमान, क्रोध और न्याय की आकांक्षा को एक साथ सामने लाती हैं। किंतु वास्तविक जीवन में न्याय और प्रतिशोध के बीच का अंतर बनाए रखना ही किसी सभ्य समाज की पहचान है। इसीलिए ऐसी फिल्मों को केवल एक्शन या हिंसा के चश्मे से नहीं, बल्कि उस सामाजिक मनोविज्ञान के दस्तावेज़ के रूप में भी देखा जाना चाहिए, जो व्यवस्था से निराश लोगों के मन में उठ रहे प्रश्नों और आक्रोश को अभिव्यक्ति देता है।

 

संबंधित सामग्री

Election Result Challenge: पत्थलगांव में 255 वोट से हार को चुनौती; HC ने EC को दस्तावेज लाने के आदेश

Election Result Challenge: पत्थलगांव में 255 वोट से हार को चुनौती; HC ने EC को दस्तावेज लाने के आदेश

जशपुर के पत्थलगांव विधानसभा सीट पर 255 वोट से हारे कांग्रेस उम्मीदवार की याचिका पर हाईकोर्टमें सुनवाई जारी है। निर्वाचन आयोग को 4 दिसंबर को चुनाव के मूल कागजात पेश करने होंगे।

Oct 16, 2026
Raja Raghuvanshi Case: मुस्कान साहिल को फांसी के बाद राजा रघुवंशी की मां का सवाल, मेरे बेटे को न्याय कब मिलेगा?

Raja Raghuvanshi Case: मुस्कान साहिल को फांसी के बाद राजा रघुवंशी की मां का सवाल, मेरे बेटे को न्याय कब मिलेगा?

मेरठ के मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा मिलने के बाद राजा रघुवंशी की मां उमा ने बेटे के लिए न्याय मांगा। उन्होंने सोनम समेत सभी आरोपियों को कड़ी सजा देने की अपील की।<br/>

Oct 15, 2026
नाना पाटेकर का निधन, 75 की उम्र में थमा दमदार आवाज का सफर

नाना पाटेकर का निधन, 75 की उम्र में थमा दमदार आवाज का सफर

हिंदी और मराठी फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर का गोवा में 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके योगदान और दमदार आवाज को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

Oct 08, 2026
MP promotion Rules: एमपी में प्रमोशन नियम 2025 को हाई कोर्ट में चुनौती, 16 अक्टूबर को विशेष बेंच में सुनवाई

MP promotion Rules: एमपी में प्रमोशन नियम 2025 को हाई कोर्ट में चुनौती, 16 अक्टूबर को विशेष बेंच में सुनवाई

मध्य प्रदेश अजाक्स कर्मचारी संघ ने मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के कुछ प्रावधानों को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर को विशेष बेंच में होगी।

Oct 07, 2026
Movie Collection: हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

Movie Collection: हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, धुरंधर का रिकॉर्ड तोड़ा

बॉलीवुड फिल्म हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर नया रिकॉर्ड बनाया है। करीब 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने 34 दिनों में 153.13 करोड़ नेट और 180.95 करोड़ ग्रॉस कलेक्शन किया।

Sep 10, 2026