US-Iran Conflict Deepens Middle East Crisis

बहु-क्षेत्रीय टकराव बढ़ाता अमेरिका-ईरान संघर्ष

अमेरिका-ईरान संघर्ष अब पूरे पश्चिम एशिया को प्रभावित कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल सप्लाई और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ते खतरे ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

By : स्वदेश डेस्क
बहु-क्षेत्रीय टकराव बढ़ाता अमेरिका-ईरान संघर्ष

प्रो. अंशु जोशी 

इस सप्ताह अमेरिका ने यह घोषणा की है कि यदि ईरान युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से होने वाली चर्चाओं के लिए सहमति नहीं देता है , तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में सैनिक भेज हमले करने और जमीनी सैनिक तैनात करने पर 'मजबूर' हो सकता है। अमेरिका ईरान संघर्ष अब एक बहु-क्षेत्रीय टकराव प्रतीत होता है जो पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय गतिशीलता को तो बदल हो रहा है साथ ही अमेरिकी शक्ति तथा छवि को चुनौती दे रहा है। यह स्थिति विभिन्न चरणों के संघर्ष, क्षेत्रीय हिंसा, होमुंज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद, और विफल युद्धविराम समझौतों के विभिन्न चरणों से गुजरी है, जो अभी भी विस्फोटक बनी हुई है। इस सप्ताह भी हमले तो जारी रहे ही हैं और युद्ध कहीं से भी धमता नजर नहीं आता। मैंने लगातार इस बात को लिखा, कहा है कि या तो अमेरिका अपने लक्ष्यों की पूर्ति में सफल हो, या दोनों पक्ष अपनी अपनी मांगों को बदलें, तभी युद्ध विराम की ओर जाता दिखाई देगा। साथ ही, इन सबमें इजराइल के हित भी ध्यान में रखने होंगे।

अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद ईरान की प्रतिक्रिया बहुद तीखी और भौगोलिक रूप से व्यापक रही, जिसमें इजराइल, अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों और बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात जैसे अमेरिका के साथ गठबंधन वाले अरब देशों को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और सशस्त्र ड्रोन की भारी बरसात का उपयोग किया गया। इसके अलावा, ईरान ने साइप्रस, तुर्की, अजरबैजान और डियागोगाशिंया पर भी आक्रामक हमले किए। परिणामस्वरूप, इससे अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता का अभूतपूर्व क्षेत्रीयकरण हुआ, खाड़ी के देशों को अग्रिम पंक्ति में खड़े होने के लिए मजबूर होना पड़ा, यूरोप के देश बिफरे, एशिया चिंताग्रस्त हुआ

जबकि संघर्ष का दायरा पूर्वी भूमध्यसागर से अरब सागर तक फैल गया। ईरान द्वारा उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक हॉमुंज जलडमरूमध्य के माध्यम से वाणिज्यिक यातायात को बंद करना रहा है। माइन बिछाकर, तटीय जहाज रोधी प्रणालियों का उपयोग करके, और टैंकरों को डरा-धमका कर, ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक बोझ डालने के लिए अपनी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाने का लक्ष्य रखा, साथ ही पिछले परमाणु समझौतों की तुलना में तेहरान के लिए अधिक अनुकूल शर्तों पर बातचीत के लिए मजबूर करने की भी कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू की और होमुंज जलडमरूमध्य के मुहाने को रोक दिया, यह तर्क देते हुए कि वह वैश्विक साझा हितों की रक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है।

 इस स्थिति ने एक खतरनाक जबरदस्ती वाले सौदेबाजी के परिदृश्य को जन्म दिया। ईरान ने धमकी दी कि यदि नाकाबंदी जारी रही तो वह तनाव बढ़ा देगा, वहीं, वाशिंगटन का कहना रहा कि तब तक प्रतिबंध और रोक जारी रहेगी जब तक तेहरान कड़े परमाणु प्रतिबंधों और क्षेत्रीय संघर्षों में तनाव कम करने के लिए सहमत नहीं हो जाता। परिणामस्वरूप, इसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में महत्वपूर्ण अस्थिरता, आपूर्ति विविधीकरण के बारे में नई बातचीत और ऊर्जा आयातक राष्ट्रों के बीच पिछले तेल मूल्य में बदलावों के बारे में बढ़ती चिंताओं को जन्म दिया। कई मौकों पर ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और नागरिक बिजली सुविधाओं पर विनाशकारी हमलों की सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है, यह दावा करते हुए कि अगर तेहरान अमेरिकी मांगों का पालन नहीं करता है तो 'एक पूरी सभ्यता' का नाश हो सकता है। 

ईरान ने भी हार न मानने और हमले तेज करने की धमकी दी। इस प्रकार के तीव्र बयानों के एक चरण के बाद, वाशिंगटन ने ईरान के साथ सीमित युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की, जिससे बड़े पैमाने पर अमेरिकी हवाई हमले प्रभावी रूप से रुक गए, जबकि नौसैनिक नाकाबंदी और संभावित नए अभियानों के लिए तत्परता बनी रही। ईरान ने अपनी ओर से तनाव कम करने के लिए सशर्त इच्छा व्यक्त की, लेकिन किसी भी स्थायी युद्धविराम को व्यापक शर्तों से जोड़ा, जिसमें लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइली कार्रवाई को रोकना और आर्थिक युद्ध में ढील देना शामिल था। जैसा की होना था, युद्धविराम विफल रहा। हाल के घटनाक्रम से तीन विश्लेषणात्मक बिंदु सामने आते हैं। पहला, इस युद्ध ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के बीच सीधे जुड़ाव को दर्शाया हैः खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने ने यह प्रदर्शित किया है कि जब इस तरह के महत्वपूर्ण सामरिक मार्ग युद्ध में शामिल हों तो युद्ध चुनौतियों के नए अध्याय खोल देता है। 

दूसरा, यह संघर्ष अमेरिका की जबरदस्त हवाई शक्ति के बावजूद, ईरान की अमेरिकी सहयोगियों पर आक्रामक जवाब देने और एक प्रतिकूल समझौते को स्वीकार करने का विरोध करने के लिए पर्याप्त क्षमता और क्षेत्रीय नेटवर्क दर्शाता है। तीसरा, यह संकट मिसाइलों, ड्रोन, साइबर क्षमताओं और सूचना युद्ध से भरे माहौल में मानव सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील कोण को उजागर करता है। अब तक हताहतों की संख्या को कम करने में मिसाइल रक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता सिग्नल इंटेलिजेंस से प्रभावित हुई है और ये सब युद्ध को एक अधिक विनाशकारी चरण में ले जाने में सक्षम है। हाल फिलहाल, अमेरिका-ईरान युद्ध सौदेबाजी की एक नाजुक स्थिति में यथावत बना हुआ है, और ऐसे बिंदु जिनमें परमाणु अविश्वास, क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता और व्यवस्था के भिन्न दृष्टिकोण शामिल हैं, अनसुलझे बने हुए हैं, जो नए सिरे से युद्ध का एक नया भीषण अध्याय खोल सकते हैं।

 

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