नई दिल्ली। देश में गेहूं और चावल का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद सरकारी गोदाम अनाज से भर गए हैं। एक तरफ गेहूं की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर चावल का भंडार तय लक्ष्य से कई गुना अधिक हो गया है। बंपर पैदावार और आक्रामक सरकारी खरीद के कारण भारत के खाद्यान्न भंडार ने नया रिकॉर्ड बना दिया है।
रिकॉर्ड उत्पादन ने बदली तस्वीर
वर्ष 2025-26 में देश में करीब 12.06 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। अच्छी मानसूनी बारिश और बेहतर कृषि प्रबंधन के चलते किसानों को शानदार उत्पादन मिला। इसके साथ ही सरकार ने भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बड़े पैमाने पर खरीद की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस सीजन में 3.5 करोड़ टन गेहूं की खरीद की गई। इसके चलते 1 जून 2026 तक केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक बढ़कर 5.34 करोड़ टन पहुंच गया, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है।
दो महीने में 150 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हुआ गेहूं
रिकॉर्ड उत्पादन के बावजूद बाजार में गेहूं के दाम बढ़े हैं। इसकी बड़ी वजह निर्यात मांग में आई तेजी बताई जा रही है।
| मंडी | अप्रैल 2026 | जून 2026 |
|---|---|---|
| दिल्ली | 2550 रु./क्विंटल | 2700 रु./क्विंटल |
| कानपुर | 2377 रु./क्विंटल | 2515 रु./क्विंटल |
| इंदौर | 2400 रु./क्विंटल | 2490 रु./क्विंटल |
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाजार में मजबूत मांग और निर्यात बढ़ने से कीमतों को समर्थन मिला है।
गेहूं निर्यात में सात गुना उछाल
मार्च 2026 में भारत से केवल 6,448 टन गेहूं का निर्यात हुआ था, लेकिन अप्रैल में यह आंकड़ा बढ़कर 45,162 टन पहुंच गया। यानी सिर्फ एक महीने में निर्यात लगभग सात गुना बढ़ गया। निर्यात में यह तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की मांग बढ़ने का संकेत मानी जा रही है।
चावल का भंडार बना रिकॉर्ड
देश में चावल उत्पादन भी नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। वर्ष 2025-26 में करीब 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ। 1 जून तक सरकारी गोदामों में धान सहित चावल का कुल भंडार 6.84 करोड़ टन तक पहुंच गया, जबकि सरकार ने 1 जुलाई के लि ए केवल 1.35 करोड़ टन का बफर स्टॉक लक्ष्य निर्धारित किया था।
यानी सरकार के पास जरूरत से पांच गुना अधिक चावल मौजूद है।
वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत पकड़
भारत दुनिया के कुल चावल निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड भंडार के कारण भारत आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार में आक्रामक निर्यात रणनीति जारी रख सकता है। अल नीनो जैसी मौसम संबंधी चुनौतियों की आशंका के बावजूद भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है, जिससे वैश्विक आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना कम रहेगी।
सोयाबीन की खेती की ओर बढ़ रहा रुझान
इस बीच किसानों का झुकाव सोयाबीन की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले महीने सोयाबीन के दाम 7,587 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए, जो चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2026 में सोयाबीन का रकबा करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, क्योंकि किसान गन्ने और मक्के जैसी अधिक पानी वाली फसलों के बजाय तिलहन फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।