सप्ताह की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। मुंबई में ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों की दौलत में भारी उछाल दिखा। यह उछाल यूं ही नहीं आया। इसके पीछे तीन अलग-अलग लेकिन असरदार घटनाएं थीं, जिन्होंने बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया और निवेशकों को आक्रामक खरीदारी के लिए प्रेरित किया।
कुछ ही घंटों में बाजार का माहौल डर से भरोसे में बदल गया। इसका नतीजा करीब 7 लाख करोड़ रुपये के फायदे के रूप में सामने आया है। सवाल अब यह कि क्या यह तेजी टिकेगी या सिर्फ एक झटका है?
क्या है असली वजह?
सबसे बड़ा ट्रिगर फार्मा सेक्टर से आया, जहां एक भारतीय कंपनी ने विदेशी कंपनी को खरीदने का ऐलान किया। इस खबर ने संकेत दिया कि भारतीय कंपनियां अब ग्लोबल लेवल पर आक्रामक विस्तार कर रही हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने के संकेत मिले। मध्य पूर्व से आई खबरों ने यह उम्मीद जगाई कि बड़े संघर्ष थम सकते हैं, जिससे तेल और ग्लोबल मार्केट पर दबाव कम होगा।
तीसरा बड़ा कारण भारत और न्यूजीलैंड के बीच संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रहा, जिसमें निवेश और टैक्स छूट जैसी बातें सामने आईं। इसने एक्सपोर्ट और बिजनेस ग्रोथ को लेकर उम्मीदें बढ़ाईं।
किन सेक्टर्स में दिखा सबसे ज्यादा असर?
फार्मा सेक्टर सबसे आगे रहा और इसने पूरे बाजार को लीड किया। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल, आईटी और बैंकिंग सेक्टर में भी मजबूत खरीदारी दिखी। बड़े शेयरों में तेजी ने इंडेक्स को सपोर्ट दिया, जिससे बाजार का ट्रेंड व्यापक हो गया। सिर्फ कुछ शेयरों को छोड़कर ज्यादातर कंपनियों में तेजी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि तेजी सिर्फ एक सेक्टर तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई थी।
डर क्यों हुआ कम?
मार्केट का ‘फियर इंडेक्स’ कहे जाने वाला India VIX नीचे आया, जो यह दिखाता है कि निवेशकों की चिंता कम हुई है। जब VIX गिरता है, तो आमतौर पर बाजार में स्थिरता और भरोसा बढ़ता है। ग्लोबल संकेत बेहतर होने और बड़ी डील्स की वजह से निवेशकों को लगा कि जोखिम फिलहाल कंट्रोल में है। इसी वजह से उन्होंने ज्यादा पैसा बाजार में लगाया।
आम निवेशक पर क्या असर?
इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हुआ, जिनका पैसा पहले से बाजार में लगा था। एक ही दिन में उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू तेजी से बढ़ गई। लेकिन जो नए निवेशक हैं, उनके लिए यह समय थोड़ा सावधानी का भी है। तेज उछाल के बाद बाजार में मुनाफावसूली भी आ सकती है, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
सरकार के स्तर पर भी ऐसे ट्रेड एग्रीमेंट और निवेश घोषणाएं आर्थिक मजबूती का संकेत देती हैं, जो लंबी अवधि में रोजगार और व्यापार पर असर डाल सकती हैं।
अब आगे क्या होगा?
तेजी के पीछे जो कारण हैं, वे अभी उम्मीदों पर टिके हैं। अगर ग्लोबल हालात फिर बिगड़े या डील्स में देरी हुई, तो बाजार का मूड जल्दी बदल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल बाजार पॉजिटिव है, लेकिन निवेशकों को खबरों के आधार पर जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसे उछाल के बाद हल्का करेक्शन आम बात है।