भारत के शेयर बाजारों में 28 अप्रैल को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही शुरू में गिरावट में थे, फिर थोड़ी देर के लिए हरे निशान में आए। लेकिन अंत में भारी गिरावट के साथ बंद हुए। इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के ₹32,400 करोड़ रुपये साफ हो गए। सेंसेक्स 417 अंक टूटकर 76,886.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 97 अंक गिरकर 23,995.70 पर सेटल हुआ।
क्यों गिरा शेयर बाजार
सेंसेक्स और निफ्टी में आए इस उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, बाजार में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली। जब सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में आए तो कई निवेशकों ने मुनाफा निकालने के लिए बिकवाली की। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी बाजार के सेंटिमेंट को खराब किया। ब्रेंट क्रूड का दाम 109.3 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा उत्पन्न हुआ।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को भारतीय बाजार से ₹1,151.48 करोड़ के शेयर बेचे। इस लगातार बिकवाली ने बाजार में दबाव डाला। इसके साथ ही, एशियाई बाजारों में गिरावट, रुपये की कमजोरी और Nifty की एक्सपायरी भी बिकवाली की वजह बनीं।
वैश्विक घटनाक्रम और पश्चिम एशिया के हालात
वैश्विक घटनाक्रमों की वजह से भी बाजार पर दबाव बना। पश्चिम एशिया में अमेरिकी अधिकारी ने ईरान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके कारण कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है। इससे वैश्विक अनिश्चितता का माहौल बना, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा।
बाजार की पिछली स्थिति
इससे पहले 27 अप्रैल को, 3 दिन की गिरावट के बाद सेंसेक्स 639 अंक चढ़कर 77,303 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 194 अंक ऊपर बंद हुआ था। हालांकि, मंगलवार को स्थिति उलट गई और भारी गिरावट देखी गई।
(Disclaimer: इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल सूचना देना है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले हमेशा एक्सपर्ट की सलाह लें। स्वदेश द्वारा किसी निवेश को लेकर सलाह नहीं दी जाती है।)