देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल यूजीसी नेट एक बार फिर विवादों में है। इस बार आरोप परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र को लेकर हैं, जहां दावा किया गया है कि 2024 के प्रश्नपत्र के 67 सवाल बिना बदलाव के दोबारा पूछे गए। आरोप यह भी है कि सिर्फ प्रश्न ही नहीं, बल्कि उनके विकल्पों का क्रम भी पहले जैसा ही रखा गया।
इन दावों के सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विनीत जिंदल ने NTA के डायरेक्टर जनरल को शिकायत भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि यूजीसी नेट 2026 की अंग्रेजी परीक्षा में बड़े पैमाने पर प्रश्न दोहराए जाने की शिकायत मिली है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
Complaint Filed with NTA Regarding UGC-NET 2026 English Paper
Today, I have formally lodged a complaint with the Director General of the National Testing Agency (NTA) seeking an immediate and independent inquiry into the reported repetition of questions in the UGC-NET 2026… pic.twitter.com/2Rfg1kR1Cg
67 सवाल दोहराने का दावा कितना गंभीर
शिकायत के अनुसार, विषय विशेषज्ञों और अभ्यर्थियों से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया गया है कि 150 में से 67 प्रश्न सीधे 2024 के अंग्रेजी प्रश्नपत्र से लिए गए। आरोप यह भी है कि उत्तर विकल्पों का क्रम भी नहीं बदला गया। यदि जांच में यह दावा सही पाया जाता है तो इसे परीक्षा प्रणाली की बड़ी चूक माना जाएगा।
करियर पर पड़ सकता है सीधा असर
यूजीसी नेट केवल एक पात्रता परीक्षा नहीं है। इसी के आधार पर देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की योग्यता तय होती है। जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और पीएचडी प्रवेश के लिए भी यही परीक्षा अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रश्नपत्र की निष्पक्षता पर उठे सवाल लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे जुड़े माने जा रहे हैं।
अभ्यर्थियों के बीच बढ़ी चिंता
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि बड़ी संख्या में पुराने प्रश्न दोहराए गए हैं तो उन अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिल सकता है, जिन्होंने पिछले प्रश्नपत्रों को विशेष रूप से तैयार किया था। वहीं, सिलेबस की व्यापक तैयारी करने वाले उम्मीदवार खुद को नुकसान में महसूस कर सकते हैं। अब इस पूरे विवाद में निगाहें NTA की प्रतिक्रिया और संभावित जांच पर टिकी हैं।