नपुंसक कहे जाने पर पति ने की थी मांग: महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए नहीं कर सकते मजबूर- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट

Chhattisgarh High Court
Chhattisgarh High Court : रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महिलाओं को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने एक आदमी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। पति ने अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की थी। वह साबित करना चाहता था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है।
ये है पूरा मामला
इस कपल की शादी 2023 में हुई थी। पत्नी ने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसका पति नपुंसक है और उसने वैवाहिक संबंध स्थापित करने से इनकार कर दिया। उसने अपने पति से 20,000 रुपए का भरण-पोषण मांगा। याचिकाकर्ता ने फिर अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की और आरोप लगाया कि वह अपने देवर के साथ अवैध संबंध है।
याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के 15 अक्टूबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और वह उसके साथ रिश्ते बनाने से इनकार करता है। कोर्ट ने आदमी से कहा कि वह अपनी नपुंसकता के आरोप को गलत साबित करने के लिए मेडिकल टेस्ट करा सकता है।
हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित चिकित्सा टेस्ट करवा सकता है या कोई अन्य सबूत प्रस्तुत कर सकता है।