मप्र सरकार ने OBC आरक्षण के प्रकरणों को सुप्रीम कोर्ट मेें ट्रांसफर करने लगाई याचिका
- मप्र शासन की पिटीशन पर 28 अप्रैल को होगी सुनवाई;
(इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के निर्णय के पैरा नंबर 810 में व्यवस्था अनुसार)
भोपाल/वेब डेस्क। मप्र सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़ी सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए पिटीशन दायर कर दी है। जिस पर 28 अप्रैल को सुनवाई होगी। हालांकि हाईकोर्ट में 24 अप्रैल को जस्टिस शील नागू एवं जस्टिस डीडी बंसल की खंडपीठ में ओबीसी आरक्षण से जुड़ी 66 याचिकाओं पर सुनवाई होना है।
मप्र हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में शासन को निर्देशित किया था कि सुप्रीम कोर्ट में पूर्व से समान मुद्दे को लेकर चार याचिकाएं विचाराधीन हैं। उक्त याचिकाओं की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में समुचित कार्यवाही करें। जब मप्र शासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई, तो हाईकोर्ट ने 18 अप्रैल को निर्णय लिया कि 24 अप्रैल से सभी याचिकाओं पर एक- एक करके नियमित सुनवाई की जाएगी। आखिरी में मप्र शासन को सुना जाएगा। हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होने से पहले ही मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक ट्रांसफर पिटीशन दाखिल कर दी है। जिसका डायरी नंबर 16441/2023 है। पिटीशन में शासन ने यह राहत चाही गई है कि ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच द्वारा इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के प्रकरण में अपहेल्ड किया गया है। दूसरी ओर इंदिरा साहनी के जजमेंट में यह भी व्यवस्था दी गई है कि कुल आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा विशेष परिस्थितियों में बढ़ा सकती है। जो कि मप्र में विद्यमान है। इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के निर्णय के पैरा नंबर 810 में व्यवस्था दी गई है कि यदि आरक्षण की सीमा किसी राज्य में 50 प्रतिशत से ऊपर बढ़ाई जाती है तो उसकी न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को ही होगा। उक्त प्रकरण में विशेष परिस्थितियां क्या होगी ? इसका निर्धारण तथा उक्त पैरा में प्रयोग शब्द दुर्गम क्षेत्र एवं रिमोट एरिया क्या होंगे परिभाषित नहीं किया गया है। उक्त समस्त बिंदुओं को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक ट्रांसफर याचिका दिनांक 19 अप्रैल 2023 को दाखिल की गई है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में विचाराधीन समस्त ओबीसी के प्रकरणों को सुप्रीम कोर्ट मैं सुनवाई किए जाने की राहत चाही गई है ताकि उक्त विवादित मुद्दे को एक बार में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निराकरण किया जा सके। मप्र में अनेक जिले तथा तहसील एवं ब्लॉक अनुसूचित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित हैं। मप्र मध्य प्रदेश में ओबीसी की आबादी 50 फीसदी से ऊपर है। अर्थात वह परिस्थितियां विद्यमान हैं। जिनको दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश में कुल आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ऊपर किया जाना न्यायिक प्रतीत होता है। उक्त समस्त परिस्थितियों को समाहित कर मध्यप्रदेश शासन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ट्रांसफर याचिका की सुनवाई 28 अप्रैल 2023 को नियत कर दी गई ह।
वहीं दूसरी ओर ओबीसी एससी एसटी एकता मंच की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश दिनांक 20 मार्च 2023 की वैधानिकता को भी चुनौती दी गई है। जिसमें हाई कोर्ट द्वारा यह कहते हुए न्यूट्रल बेंच गठित करने का आवेदन खारिज कर दिया गया था कि सुनवाई करने वाली बेंच के न्यायधीश गण के विरुद्ध आवेदन में कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाए गए हैं। इसलिए निष्पक्ष बेंच गठित किया जाना न्याय प्रतीत नहीं होता है। यह जानकारी मध्यप्रदेश शासन की ओर से हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की पैरवी के लिए नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं बनाए प्रसाद शाह ने दी ।