अरुणेश झा,हिसार। विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रशासनिक नाकामी, बेरुखी और सीधी वादाखिलाफी के कारण गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUST) के 120 से अधिक टीचिंग (गेस्ट फैकल्टी) और 100 से अधिक नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की इस बार 'काली दिवाली' मनना तय हो गया है। बीते 5 महीनों से वेतन न मिलने के कारण 220 से अधिक परिवार भुखमरी और आर्थिक तंगी के कगार पर पहुंच गए हैं। दीपावली के इस पावन अवसर पर जहां हर घर में दीये जल रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय परिसर में अंधकार और घोर निराशा का साया मंडरा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह पूरा खेल कार्यवाहक कुलसचिव के इशारे पर खेला जा रहा है, जिसकी वजह से कुलपति के आश्वासन के बावजूद अब तक एक रुपया भी उनके बैंक खातों में नहीं पहुंचा है।
खास बातें
Bullet 220+ पीड़ित: 120 से अधिक गेस्ट फैकल्टी और 100 से अधिक नॉन-टीचिंग स्टाफ का पिछले 5 महीनों से वेतन बकाया।
24 प्रमुख विभागों में हाहाकार: नर्सिंग (18), भूगोल (7), कॉमर्स (7), एचएसबी (7), बॉटनी (5), एआई व डेटा साइंस (5) समेत विश्वविद्यालय का मुख्य शैक्षणिक ढांचा पूरी तरह प्रभावित।
झूठा आश्वासन: 30 अक्टूबर को कार्यवाहक कुलपति डॉ. विजय कुमार ने दिया था 2 नवंबर तक भुगतान का आश्वासन।
प्रशासनिक खेल: कार्यवाहक कुलसचिव के इशारे पर अटकाया गया वेतन; कार्यवाहक कुलपति ने शिक्षकों के फोन उठाना भी किया बंद।
30 अक्टूबर का आश्वासन और पर्दे के पीछे की साजिश
वेतन संकट को लेकर गत 30 अक्टूबर को गेस्ट फैकल्टी का एक प्रतिनिधिमंडल कार्यवाहक कुलपति डॉ. विजय कुमार से मिला था। उस दौरान कुलपति महोदय ने अध्यापकों को पूर्ण आश्वस्त करते हुए आधिकारिक वादा किया था कि 2 तारीख (नवंबर) तक हर हाल में बकाया 5 महीने का वेतन जारी कर दिया जाएगा। कुलपति के इस स्पष्ट और आधिकारिक आश्वासन पर भरोसा करके दूर-दराज से आए सभी शिक्षक और कर्मचारी त्योहार मनाने अपने-अपने घर चले गए। लेकिन दीपावली का समय आ जाने और 2 तारीख बीत जाने के बाद भी किसी भी कर्मचारी के खाते में वेतन नहीं पहुंचा।
पीड़ित कर्मचारियों का साफ तौर पर आरोप है कि यह पूरा खेल कार्यवाहक कुलसचिव के इशारे पर रचा गया है और उन्हीं की शह पर कागजी प्रक्रियाओं को अटकाकर रखा गया है। प्रशासन ने केवल त्योहार पर छुट्टी दिलाकर मामला टालने और शिक्षकों को घर भेजने की साजिश रची थी। हद तो तब हो गई जब संकट के इस दौर में कार्यवाहक कुलपति डॉ. विजय कुमार ने शिक्षकों के फोन तक उठाना बंद कर दिया है, जिससे कर्मचारियों में भारी गुस्सा और निराशा है।
24 से अधिक विभागों में पढ़ाई कराने वाले शिक्षक बेहाल
वेतन न मिलने से प्रभावित शिक्षकों का आंकड़ा केवल एक-दो विषयों तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय के मुख्य शैक्षणिक ढांचे पर इसका सीधा असर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार:
सर्वाधिक प्रभावित विभाग: नर्सिंग विभाग के 18, भूगोल के 7, एचएसबी के 7, कॉमर्स के 7, एआई व डेटा साइंस के 5, बॉटनी के 5, पर्यावरण एवं सिविल के 5 और साइकोलॉजी के 5 शिक्षक प्रभावित हैं।
Bullet अन्य विभाग: इकोनॉमिक्स (4), योग (4), मैकेनिकल (4), एलाइड हेल्थ साइंस (4), जूलॉजी (3), लॉ (3), फूड टेक्नोलॉजी (3), केमिस्ट्री (3), एजुकेशन (2) के अलावा इंग्लिश, प्रिंटिंग, ईईई, बायोटेक, डिस्टेंस एजुकेशन समेत फिजिक्स, मैथ्स, फार्मेसी, फिजियोथेरेपी, मास कम्युनिकेशन और सीएसई जैसे सभी प्रमुख विभागों का गेस्ट स्टाफ 5-5 महीने के बकाया का इंतजार कर रहा है। कुल मिलाकर 94 से अधिक नामांकित गेस्ट फैकल्टी और अन्य संबंधित विभागों का शिक्षण ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
कर्मचारियों की चेतावनी: अब आर-पार की लड़ाई
दीपावली अवकाश के बाद विश्वविद्यालय खुलते ही पीड़ित टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ ने उग्र आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी दी है। पीड़ित अध्यापकों का कहना है:जब देश भर में लोग खुशियां मना रहे हैं, तब 5 महीने से बिना वेतन काम कर रहे शिक्षक अपने बच्चों के लिए दीये और मिठाइयां तक नहीं खरीद पा रहे हैं। कुलपति के आश्वासनों की कोई कीमत नहीं रही और कुलसचिव के इशारे पर कर्मचारियों के हक पर डाका डाला जा रहा है। यह सीधी-सीधी वादाखिलाफी है। छुट्टी से लौटते ही अब केवल बातचीत नहीं होगी, बल्कि पूर्ण कार्य बहिष्कार, विरोध प्रदर्शन और तालाबंदी की जाएगी।"
प्रशासन की इस बेरुखी और अंदरूनी सांठगांठ ने न केवल कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर प्रहार किया है, बल्कि विश्वविद्यालय की साख को भी गहरा बट्टा लगाया है। अब देखना यह होगा कि भड़कते जनआक्रोश के बाद नींद से जागा प्रशासन क्या कदम उठाता है।