नई दिल्लीः देश के कई राज्यों में बिना सरकारी मान्यता और जरूरी पंजीकरण के संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश में भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां संस्थानों की मान्यता बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। इन कार्रवाइयों से हजारों बच्चों का भविष्य बचा है, जो इन संस्थानों में पढ़ रहे हैं ।
मध्य प्रदेश: मुरैना से ग्वालियर तक कार्रवाई
मध्य प्रदेश में मदरसों के भौतिक सत्यापन के दौरान पहले भी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं ।अक्टूबर 2026 में ग्वालियर के एजी ऑफिस के पास स्थित दारुल कुरआन मदरसे पर बाल आयोग ने कार्रवाई की। निरीक्षण के दौरान प्रबंधन मान्यता और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की नियमित पढ़ाई और देखरेख की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। कार्रवाई में 22 बच्चों को रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति की निगरानी में भेजा गया।
मुरैना के खड़ियाहार गांव स्थित आयशा इस्लामिया मदरसे का मामला सामने आया । अगस्त 2026 में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निरीक्षण में रिकॉर्ड में 445 बच्चों के नाम दर्ज मिले, जबकि मौके पर केवल 35 बच्चे मौजूद थे ।मदरसे को सील कर दिया गया। अगस्त 2024 में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया था कि जांच में 56 मदरसे नियमों के अनुरूप संचालित नहीं पाए गए। इनकी मान्यता समाप्त कर अनुदान बंद किया गया था।
पश्चिम बंगाल में 2396 मदरसे बिना जरूरी पंजीकरण
पश्चिम बंगाल में 22 जिलों और कोलकाता के सर्वेक्षण में 2396 मदरसे बिना जरूरी सरकारी पंजीकरण या मान्यता के संचालित मिले। इनमें 252 को बंद करने और 100 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया ।
उत्तर प्रदेश में करीब 24 हजार मदरसों में लगभग आठ हजार गैरमान्यता प्राप्त मिले हैं । फर्जी भूमि दस्तावेजों के आधार पर मान्यता लेने के मामलों में भी कार्रवाई हुई है।
उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में भी कार्रवाई
उत्तराखंड में नई शिक्षा व्यवस्था के तहत मदरसों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है । उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 21 मदरसे सील किए गए और 108 ने स्वयं संस्थान बंद करने की सूचना दी ।
जम्मू-कश्मीर में भी बच्चों की सुरक्षा और संस्थानों के संचालन को लेकर कार्रवाई हुई। श्रीनगर में जुलाई 2026 में एक मदरसे से 16 बच्चों को रेस्क्यू कराया गया, जबकि किश्तवाड़ में दो मदरसों के करीब 100 बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजा गया ।
बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
मदरसों की मान्यता पंजीकरण और प्रबंधन में गड़बड़ियों पर कार्रवाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि वहां पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा बाधित न हो। बच्चों को उम्र और कक्षा के अनुसार मान्यता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश मिले और उनकी सुरक्षा की जवाबदेही तय हो ।
सरकारों की सख्ती के बाद अवैध मदरसों पर हुई कार्यवाही से हजारों बच्चों का भविष्य बच गया जो इन मदरसों में शिक्षा लेने पहुंचे थे और बच्चों को भी बचाया जा सका जो आगे इनमें दाखिला लेते।