मुंबई में भजन क्लबिंग का चलन

पार्टी नहीं, भक्ति पर जोर : मुंबई में बढ़ी भजन मंडलियों की लोकप्रियता

मुंबई में युवाओं के बीच भजन क्लबिंग का चलन बढ़ रहा है, जहां वे बिना शराब और नशीले पदार्थों के आध्यात्मिक संगीत और नृत्य का आनंद लेते हैं।

By : नरेंद्र कुमार
पार्टी नहीं, भक्ति पर जोर : मुंबई में बढ़ी भजन मंडलियों की लोकप्रियता

जेन जी अब मनोरंजन के साथ मानसिक शांति को दे रही तरजीह

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में युवाओं के बीच एक नया सामाजिक और आध्यात्मिक ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे 'भजन क्लबिंग' कहा जा रहा है। यह पारंपरिक नाइट क्लबों से बिल्कुल अलग अनुभव है, जहां तेज संगीत, शराब और नशे की जगह भक्ति, भजन और सामूहिक आध्यात्मिक माहौल केंद्र में होता है।

एक विशाल विमान हैंगर जैसे आयोजन स्थल के बाहर बड़ी संख्या में जेन जी के ऑफिस जाने वाले युवा और किशोरों की भीड़ जुटती है। कार्यक्रम में प्रवेश से पहले आयोजन कर्मी प्रतिभागियों के क्यूआर कोड स्कैन करते हैं और उनकी कलाई पर बैंड बांधते हैं। इस दौरान दोस्त एक-दूसरे के साथ सेल्फी लेते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं।

रात होते ही आयोजन स्थल के दरवाजे खुलते हैं और करीब 5,000 लोग अंदर प्रवेश करते हैं। अंदर पहुंचने के बाद सभी अपने जूते उतारकर फर्श पर पालथी मारकर बैठ जाते हैं। रोशनी धीमी हो जाती है और लोग संगीत शुरू होने का इंतजार करते हैं। सबसे आगे की पंक्ति में एक युवा मां अपने बच्चे को कंधे पर लेकर बैठी दिखाई देती है।

अब सनातन संस्कृति की ओर लौट रहे महानगरों के युवा

  • आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में युवा और किशोरों की भीड़ जुटती है।

  • आयोजनों में तेज इलेक्ट्रॉनिक या पॉप संगीत नहीं बजता।

  • पुराने भजनों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बनता है और युवा ध्यान में डूब जाते हैं।

  • भक्ति में लीन युवा ताली बजाते हैं, मंत्रोच्चार करते हैं और सामूहिक नृत्य भी करते हैं।

  • इस तरह के आयोजन 'भजन क्लबिंग' के नाम से जाने जाते हैं।

पुराने भजनों पर समर्पण भाव से झूमते हैं युवा

जब संगीत शुरू होता है, तो वहां तेज इलेक्ट्रॉनिक या पॉप संगीत नहीं बजता। इसके बजाय सदियों पुराने हिंदू भक्ति गीत और भजन गूंजते हैं, जो सामान्यतः मंदिरों या धार्मिक शोभायात्राओं में सुनाई देते हैं। जैसे-जैसे भजनों की धुन आगे बढ़ती है, पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। बड़ी संख्या में युवा खड़े होकर ताली बजाते हैं, भजन गाते हैं, मंत्रोच्चार करते हैं और सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं।

दिव्य ऊर्जा से भर जाता है पूरा वातावरण

कार्यक्रम का वातावरण उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि यहां शराब, नशीले पदार्थ या किसी भी प्रकार के ड्रग्स की अनुमति नहीं है। आयोजकों ने इन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है और प्रतिभागी भी इस व्यवस्था का पूरा समर्थन करते हैं।

दुनिया में बढ़ रहा है 'सॉबर' आयोजनों का चलन

इस तरह के आयोजनों को भजन क्लबिंग के नाम से जाना जा रहा है। यह भारत में तेजी से उभरता हुआ ऐसा ट्रेंड है, जिसमें युवा बिना शराब या नशे के सामूहिक संगीत और आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लेते हैं।रिपोर्ट के अनुसार, यह चलन यूरोप और अमेरिका में लोकप्रिय हो रहे 'सॉबर क्यूरियस' आयोजनों और 'कॉफी रेव्स' जैसी गतिविधियों से मिलता-जुलता है। इन आयोजनों में भी युवा पारंपरिक पार्टी संस्कृति से अलग होकर बिना शराब और नशीले पदार्थों के सामाजिक मेलजोल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मुंबई में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम यह दिखाते हैं कि दुनिया भर में जेन जी की एक बड़ी आबादी अब मनोरंजन के साथ-साथ मानसिक शांति, आध्यात्मिक जुड़ाव और स्वस्थ जीवनशैली को भी महत्व दे रही है। यही कारण है कि भजन, सामूहिक गायन और आध्यात्मिक संगीत पर आधारित ऐसे आयोजन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

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