नई दिल्ली। देश में एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन में बढ़ोतरी का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने गैस वितरकों को मिलने वाले डीलरशिप कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त सिफारिश करने पर सहमति जताई है। बढ़ते खर्च के बीच वितरकों को लंबे समय से राहत का इंतजार था। हालांकि, प्रस्ताव पर अंतिम फैसला पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को लेना है।
दरअसल, मुंबई में 21 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद इस दिशा में सहमति बनी। ऑल इंडिया एचपी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएश ने भी इसकी पुष्टि की है। अब सबकी नजर मंत्रालय की मंजूरी पर है। इसके बाद कमीशन में बदलाव लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है।
तेल कंपनियों की सहमति के बाद अब फैसले का इंतजार
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन यानी आईओसीएल के मुंबई स्थित मुख्यालय में 21 अक्टूबर को सरकारी तेल कंपनियों और ऑल इंडिया हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएश के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। इसके अगले दिन 22 अक्टूबर को एसोसिएश के चेयरमैन ने आधिकारिक पत्र जारी कर कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी को लेकर बनी सहमति की जानकारी दी।
एसोसिएशन के अनुसार, तेल कंपनियों के प्रबंधन ने बताया कि कमीशन में संसोधन से जुड़े प्रस्ताव पहले ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। कंपनियों के निदेशकों ने तय समय सीमा के भीतर अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त सिफारिश करने पर भी सहमति जताई है। फिलहाल इस प्रस्ताव को मंत्रालय की मंजूरी मिलना बाकी है। ऐसे में अभी बढ़े हुए कमीशन की नई दर या उसके लागू होने की तारीख तय नहीं हुई है।
एलीपीजी सिलेंडर अभी कितना है कमीशन
बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के तहत घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो ग्राम के एलपीजी सिलेंडर पर वितरकों को लगभग 73 रुपये कमीशन मिलता है। इसमें करीब 30 से 35 रुपये डिलीवरी से जुड़े खर्च के लिए निर्धारित होते हैं। इसी रकम में वितरकों को सिलेंडर की आपूर्ति और सुरक्षित डिलीवरी से जु़ड़े खर्च संभालने पड़ते हैं। लंबे समय से डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि मौजूदा कमीश बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। इसी वजह से वे इसमें संसोधन की मांग कर रहे हैं।
वेतन से लेकर ईंधन और गोदाम रेंट तक खर्च बढ़ा
गैस वितरकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजमर्रा के परिचालन खर्च में बढ़ोतरी है। डिलीवरी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ने के साथ पेट्रोल और डीजल पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। इसके अलावा गोदाम का किराया और अन्य ऑपेरेटिंग कॉस्ट भी डिस्ट्रीब्यूटर्स पर आर्थिक दबाव डाल रही है। वहीं, वितरकों को उम्मीद है कि अंतरिम बढ़ोतरी से उन्हें कुछ राहत मिलेगी।
मंजूरी मिलते ही लागू हो सकता है संसोधित कमीशन
तेल कंपनियों की सहमति के बाद अब प्रस्ताव पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की मुहर लगना जरूरी है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही संसोधित कमीशन लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कमीशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इसलिए वितरकों को नई दरों की घोषणा के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा।