पाकिस्तान से भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि कराची के पास स्थित चरना द्वीप पर लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों को स्कूबा डाइविंग और समुद्री गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस रिपोर्ट ने 26 नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमले की यादें ताजा कर दी हैं, जब आतंकियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई पहुंचकर हमला किया था।
आतंकी संगठन अब जमीन के रास्ते घुसपैठ के अलावा समुद्री रास्तों से भी अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, चरना द्वीप पर आतंकी प्रशिक्षण और किसी संभावित हमले की योजना से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कहां है चरना द्वीप, क्यों है चर्चा में?
चरना द्वीप पाकिस्तान के अरब सागर में स्थित एक छोटा और निर्जन द्वीप है। यह कराची के पास मुबारक गांव से लगभग 9 किलोमीटर दूर बलूचिस्तान और सिंध प्रांत की सीमा के नजदीक स्थित है। यह इलाका स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और समुद्री पर्यटन के लिए जाना जाता है।
द्वीप के आसपास समुद्री चट्टानें और मूंगा भित्तियां मौजूद हैं। यहां पानी के भीतर की गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं। इसी वजह से यह जगह आम पर्यटकों और डाइविंग करने वालों के बीच लोकप्रिय है।
लश्कर के समुद्री प्रशिक्षण का क्या है दावा?
रेजोनेंट न्यूज की 5 नवंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से जुड़े कुछ लोग चरना द्वीप के आसपास स्कूबा डाइविंग करते दिखाई दिए हैं। रिपोर्ट में समुद्री प्रशिक्षण से जुड़े वीडियो और कुछ लोगों की पहचान होने का भी दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस गतिविधि को लश्कर की समुद्री क्षमताएं बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले भी भारतीय खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में लश्कर से जुड़े नेटवर्क द्वारा स्कूबा डाइविंग और समुद्री प्रशिक्षण आयोजित करने की आशंका जताई गई थी।
26/11 हमले की याद क्यों आई?
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने समुद्री रास्ते से भारत में प्रवेश किया था। आतंकियों ने मुंबई के कई प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी।
इस घटना ने भारत की तटीय सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया था। अब चरना द्वीप से जुड़े ताजा दावों के बाद समुद्री रास्तों से संभावित घुसपैठ को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?
भारत की लंबी समुद्री सीमा और पश्चिमी तट पर मौजूद महत्वपूर्ण बंदरगाहों की सुरक्षा हमेशा से अहम रही है। मुंबई, गुजरात और कोच्चि जैसे तटीय क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों, नौसैनिक ठिकानों और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा महत्वपूर्ण है।
समुद्री रास्तों से किसी भी तरह की घुसपैठ की कोशिश तटीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे में समुद्री निगरानी, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान और नौसेना तथा तटरक्षक बल के बीच समन्वय की अहमियत बढ़ जाती है।
क्या फिर समुद्र के रास्ते हमला कर सकते हैं आतंकी?
चरना द्वीप को लेकर सामने आए दावों ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या आतंकी संगठन फिर से समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं। अभी किसी नए हमले की निश्चित योजना या भारत को निशाना बनाने की पुष्टि नहीं हुई है।
फिर भी 26/11 का अनुभव बताता है कि समुद्री सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी बड़े खतरे में बदल सकती है। इसलिए चरना द्वीप से जुड़ी गतिविधियों और उनसे संबंधित खुफिया इनपुट पर नजर रखना भारत की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।