पहला जत्था लिपुलेख पार कर चीन पहुंचा

5 साल बाद खुला कैलाश मानसरोवर का रास्ता, पहला जत्था लिपुलेख पार कर चीन पहुंचा

करीब 5 साल बाद शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा का पहला दल लिपुलेख दर्रे से तिब्बत पहुंच गया। 10 जत्थों में 500 श्रद्धालु इस साल यात्रा करेंगे।

By : स्वदेश डेस्क
5 साल बाद खुला कैलाश मानसरोवर का रास्ता, पहला जत्था लिपुलेख पार कर चीन पहुंचा

पिथौरागढ़। करीब पांच साल बाद दोबारा शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक पड़ाव आया। 52 सदस्यीय पहला जत्था उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे को पार कर तिब्बत (चीन) में प्रवेश कर गया। सीमा पर चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों के दस्तावेजों की जांच की, जिसके बाद उन्हें यात्रा के अगले चरण के लिए रवाना किया गया। पहला दल सुबह नाभीढांग से रवाना हुआ। इसमें 48 श्रद्धालु, एक चिकित्सा कर्मी और तीन किचन स्टाफ शामिल थे। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान यात्रियों को लिपुलेख दर्रे तक सुरक्षित लेकर पहुंचे।

सीमा पर हुई दस्तावेजों की जांच

लिपुलेख दर्रे पर पहुंचने के बाद चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन किया। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद यात्रियों को चीनी प्रशासन की निगरानी में कैलाश मानसरोवर यात्रा के अगले पड़ाव के लिए रवाना किया गया।

भूस्खलन से रुका दूसरा दल

यात्रा का दूसरा दल शुक्रवार को धारचूला से गुंजी के लिए रवाना हुआ, लेकिन तवाघाट-गुंजी मार्ग पर भूस्खलन के कारण करीब डेढ़ घंटे तक रास्ता बंद रहा। सड़क खुलने के बाद सभी यात्री सुरक्षित गुंजी पहुंच गए। प्रशासन और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने यात्रा मार्ग पर भोजन, आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की है। मौसम को देखते हुए श्रद्धालुओं की लगातार स्वास्थ्य निगरानी भी की जा रही है।

CM धामी ने दिखाई थी हरी झंडी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई को टनकपुर से पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस वर्ष लिपुलेख मार्ग से 10 जत्थों में कुल 500 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा करेंगे।

अब पहले से आसान हुई यात्रा

इस बार यात्रा की कुल दूरी 1,738 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 1,690 किलोमीटर वाहन से और केवल 38 किलोमीटर पैदल ट्रेक करना होगा। साल 2019 से पहले श्रद्धालुओं को धारचूला से लिपुलेख तक 60 किलोमीटर से अधिक पैदल चलना पड़ता था, लेकिन भारत और चीन की ओर सड़क निर्माण होने से अब यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई है। इससे बुजुर्गों और पहली बार यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलेगी।

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