अनुराग उपाध्याय भोपाल
भारतीय जनता पार्टी के चरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्य का कहना है सामाजिक जीवन और राजनीति में विभिन्न पदों पर रहते उनके पास भी तरह-तरह के प्रलोभन आए, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा ने उनको मार्ग से फिसलने नहीं दिया। एक समय वह भी था जब उन्होंने जूते तक बेचे।
विभिन्न पदों पर रहे श्री आर्य ने कहा राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्र में काम करने के दौरान प्रलोभन भी खूब आते हैं, लेकिन माता-पिता के संस्कार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शिक्षा का परिणाम है कभी प्रलोभन के आगे नहीं झुके। हम गरीब परिवार से थे मेरे पिताजी मकान बनाते थे, कारीगर थे। बाबा जूते बनाते थे, जिसे पनई कहा जाता है। मैं भी कई बार हाट में जाकर जूते बेचता था, लेकिन किसी प्रलोभन को स्वीकार नहीं किया। संघ ने सिखाया कि हमें विचार के लिए काम करना है। इस 41-42 साल की यात्रा में आधी भी आई, तुफान भी आए। लेकिन संघ और भाजपा के नेताओं से प्रेरणा मिलती रही।
बाल्यकाल में ही भिंड में खाते आर्य स्वयंसेवक बन गए थे। वे बताते है संघ का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव है। उन्होंने बताया बचपन में सखेलने की दृष्टि से हम संप की शाखा में जाने लगे। वहां राष्ट्रीय भावनाओं से जोड़ने वाले गीत और बौद्धिक ने जीवन की दिशा बदल दी। शाखा में जाने लगे तो वहां प्रमुख बना दिया गया, फिर गण प्रमुख बने और कुछ बड़े हुए तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए।
आप तो खिलाड़ी भी अच्छे रहे हैं मैदान में भी और राजनीति के भी, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि खेलना मेरा शौक रहा है इसलिए में पांच बार पश्चिम क्षेत्र में कबड्डी खेला हूं। मैं विश्वविद्यालय का कप्तान भी रहा हूं और मुझे बहुत से ओपन टूनमिंट में सखेलने का अवसर मिला। राजनीति मेंआऊंगा इसके बारे में सोचा भी नहीं था, राजनीति का खिलाड़ी तो दूर की बात है। विद्यार्थी परिषद में मैंने 1982 से 1984 तक काम किया। 1984 में मुझे भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा का महामंत्री बनाकर राजनीति में प्रवेश कराया गया। अब तक सफर कैसा रहा? इसके जवाब में उन्होंने कहा- जब में आया तब कांग्रेस का बोलबाला था। भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व कहीं न कहीं सभी समाजों में विचारवान और संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को जोड़ने और उसके निर्माण का काम करता है।
संगठन की दृष्टि से जो भी कार्यक्रम होते थे, जो भी दायित्व मिला उसे निभाने का प्रयास करता रहा। मैं बहुत सौभाग्यशाली कार्यकर्ता हूं, जिसे कभी मांगना नहीं पड़ा। संगठन ने खुद आगे बढ़कर मुझे जिम्मेदारियां दीं। युवा मोर्चा में काम से अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने तक संगठन ही सब कुछ करता रहा। 1984 से अब तक 41-42 साल का लंबा कालखंड हो गया है। इस बीच संगठन और सरकार में मंत्री के रूप में काम करने का मौका मिला।
नामांकन भरने तक के लिए पैसे नहीं थे
आर्य ने बताया 1998 में मुझे गोहद विधानसभा से टिकट मिला, तब मेरे पास नामांकन भरने के लिए पैसे भी नहीं थे। तब मेरे साहू भाई ने अपने वेतन से पैसे दिए। फिर कार्यकर्ताओं ने मदद की और चुनाव लड़ा। तब से लेकर पार्टी ने मुझे कई चुनाव लड़ाए। मुझे तीन बार विधायक बनने का मौका मिला और मंत्री भी बना।
दिग्विजय का कालखंड सबसे काला खंड रहा
कांग्रेस की दुकान के शटर 80 प्रतिशत डाउन हो चुके
एक सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य ने कहा मैंने कई मुख्यमंत्रियों को काम करते देखा हर नेता की अपनी कार्यशैली होती है। दिग्विजय सिंह ने प्रदेश का ही बेड़ागर्क कर दिया था। दिग्विजय का कालखंड प्रदेश के लिए सबसे कालाखंड रहा। आम लोग सुविधाओं तक से मरहम थे। उमा भारती ने प्रदेश में विकास की नीव रखी, इसके बाद बाबूलाल गौर ने उसे आगे बढ़ाया। शिवराज सिंह चौहान के समय में मध्य प्रदेश में काफी विकास हुआ। अब डॉ. मोहन यादव कई नवाचार करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कोई योजना बंद नहीं की बल्कि लाड़ली बहना का पैसा बढ़ाया। जगह-जगह उद्योग सम्मलेन किए। वे निवेश और रोजगार पर विशेष कार्य कर रहे हैं। श्री आर्य ने कहा कांग्रेस की दुकान के शटर 80 प्रतिशत डाउन हो चुके हैं। काग्रेस अब धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है।
आगे क्या योजना है? इसके जवाब में आर्य का कहना है हम कार्यकर्ता है। हमारी योजना संगठन बनाता है। संगठन का जी आदेश होता है हम वहीं करते हैं।