मध्‍यप्रदेश में जारी है मिशनरी की मनमानी, धर्मांतरण की हद पार, हिन्‍दू बच्‍ची को बना दिया कागजों में ईसाई

बालिकागृह में आयोग ने पकड़े अपने को फॉदर बताने वाले दो लोग;

Update: 2023-05-09 12:59 GMT

राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो निरीक्षण करते हुए

भोपाल/डॉ. मयंक चतुर्वेदी/वेब डेस्क। मध्‍य प्रदेश में इन दिनों एक के बाद एक ईसाई मिशनरी की मनमानी सामने आ रही है, कभी सेवा के नाम पर धन उगाही तो कभी माइनॉरिटी की आड़ में बिना मान्‍यता के आरटीई (शिक्षा के अधिकार कानून) की धज्‍ज‍ियां उड़ाते हुए विद्यालय संचालन तो कहीं मानव भ्रूण और शराब की तमाम बोतलों का मिलना जारी है। हर जगह धर्मांतरण सामग्री बड़ी मात्रा में मिल रही है। ताजा मामला एनएच-44 स्‍थ‍ित सागर के सेंट फ्रांसिस सेवाधाम आश्रम से जुड़ा है। जहां राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग और राज्‍य बाल आयोग के सदस्‍यों ने कई धांधलियों को पकड़ा है। बच्‍चों के इस सेवाधाम में मुरैना के सेंटमेरी स्‍कूल की तरह ही कई शराब की बोतले पाई गईं हैं। बड़ी संख्‍या में धर्मप्रचार की सामग्री मिली है और सेवा के नाम पर विदेशों से डॉलर में उगाही करने के साथ ही बच्चों को कई वर्षों से अपने परिजन से नहीं मिलने देने जैसी अनेक गड़बड़ियां मिली हैं। बच्‍चों को कागजों में ईसाई बना देने जैसे मामले भी प्रकाश में आए हैं।

इस संबंध में केंद्र और राज्‍य बाल आयोग ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो के नेतृत्‍व में सोमवार रात अपनी कार्रवाई की है। जिसमें कि कार्रवाई करते समय शासकीय कार्य में बाधा डालने और राज्‍य आयोग सदस्‍य डॉ. निवेदिता शर्मा के साथ अभद्रता भी की गई, जिसके बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दो लोगों को जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के दौरान मध्‍य प्रदेश राज्‍य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से टीम में ओंकार सिंह एवं मेघा पवार भी साथ में रहे।

स्वयं को पादरी बताने वाले ने राज्य आयोग की महिला सदस्य से की अभद्रता

अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बताया कि सेंट फ्रांसिस सेवाधाम आश्रम में जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिली हैं। जिन्‍हें जांच में ले लिया गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन से भी उनकी जांच करने के लिए कहा गया है। उन्‍होंने इस संबंध में मंगलवार सुबह एक ट्वीट भी किया और बताया, ''मध्यप्रदेश के सागर ज़िले में सेंट फ़्रांसिस मिशनरी के निरीक्षण में अनेक गड़बड़ियाँ मिलीं, स्वयं को पादरी बताने वाले एक व्यक्ति ने राज्य आयोग की एक महिला सदस्य से अभद्रता की, अनाथ बच्चों के आश्रम के नाम सरकार से मिली सैंकड़ों एकड़ शासकीय भूमि पर चर्च बने मिले व खेती भी की जा रही है। शराब की बोतलें भी पायी गई। बच्चों के नाम पर विदेशों से फ़ंडिंग ली जा रही थी,बच्चों को वर्षों से उनके परिवार से नहीं मिलवाया गया न ही वापिस घर भेजा गया एसआईआर व आईसीपी नहीं मिले अपंजीकृत हॉस्टल भी चल रहे हैं। एक बच्ची का नाम बदले जाने के भी संकेत मिले हैं जिसमें धर्म परिवर्तन की आशंका है।'' उन्‍होंने अपने किए गए इस ट्वीट को विशेष तौर पर मध्‍य प्रदेश के मख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को टैग भी किया है।

कई संस्‍थान एक साथ संचालित, नियमानुसार नहीं है मिशनरी के पास कोई जानकारी

अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो का कहना है कि सेंट फ्रांसिस सेवाधाम आश्रम में किशोर न्याय अधिनियम के तहत अलग-अलग प्रकार के संस्थान जैसे दिव्यांग, मानसिक रूप से कमजोर और बालक-बालिका छात्रावास समेत अन्य कार्य संचालित हो रहे हैं। इन सभी में अनेक खामियां पाई गईं, खासकर बालक छात्रावास के पंजीयन की जानकारी सही नहीं मिली। यह किस आधार पर चलाया जा रहा है जब इसकी जानकारी मांगी गई तो वह भी सेंट फ्रांसिस सेवाधाम आश्रम मुहैया नहीं करा सका।


बच्‍चों के फोटो दिखाकर विदशों से उगाही करते हैं डॉलर में रकम

उन्‍होंने बताया कि सेंट फ्रांसिस सेवाधाम में विदेशों से डॉलर के रूप में उगाही किए जाने की जानकारी मिली है। जो बच्चे की फोटो भेजकर स्पांसरशिप के नाम पर लिए जाते रहे हैं। ऐसे दस्तावेज यहां प्राप्‍त हुए हैं जोकि न हिंदी में और न अंग्रेजी में हैं । इनमें कुछ मलयालन और कुछ लैटिन भाषा में हैं। अब हम इनकी भाषा विशेषज्ञ द्वारा ही जांच कराएंगे।

राष्‍ट्रीय बाल आयोग अध्‍यक्ष का कहना यह भी रहा कि जब सेवाधाम में दो हॉस्टल जो यहां संचालन हो रहे हैं कि बारे में पूछा गया कि यह किस विभाग के अंतर्गत संचालित हैं, तो इसकी जानकारी नहीं मिली। जांच में सेवाधाम के संचालकों द्वारा शिक्षा विभाग को गलत जानकारी देना पाया गया है। शिक्षा विभाग को बताया गया है कि यहां स्कूल भी छात्रावास के साथ चल रहा है जबकि विद्यालय यहां दूर-दूर तक कहीं नजर नहीं आया।

बालिकागृह में आयोग ने पकड़े अपने को फॉदर बताने वाले दो लोग

इस संबंध में राज्‍य बाल संरक्षण आयोग की सदस्‍य डॉ. निवेदिता शर्मा ने बताया कि जब मैं बालगृह बालिका का निरीक्षण कर रही थी, तभी दो लोग वहां आए जो स्‍वयं को फॉदर बता रहे थे, बालगृह बालिका में मौजूद सिस्‍टरर्स भी उनका साथ दे रहीं थीं और वे मुझसे दुर्व्यवहार करने लगे। गलत तरह से बातचीत करने के साथ वे वीडियो भी बना रहे थे, जिसके लिए मेरे द्वारा बार-बार मना किया गया। इसके बाद भी वे नहीं रुके। वे अंदर से बाहर आए थे, इस पर मैंने आपत्‍त‍ि ली।

मिशनरी ने नहीं किया अनाथ बच्‍चों को लीगल फ्री

उन्‍होंने बताया कि ये घटना तब हुई जब हमारे अन्‍य साथी बालक एवं बालिका छात्रावास देखने गए थे। वास्‍तव में यहां मेरी आपत्‍त‍ि बालिका गृह में इन दोनों पुरुषों का पाया जाना था। अनिमितताओं के विषय में पूछे जाने पर डॉ. निवेदिता शर्मा ने बताया कि बच्‍च‍ियां यहां बचपन से रह रही हैं, ये अनाथ हैं किंतु इसके बाद भी इन्‍हें इतने वर्षों से यहां रखा गया है, कानूनी तौर पर लीगल फ्री की प्रक्रिया की जानी चाहिए थी, जिसका कि अभी तक कोई पालन नहीं किया गया।

भोजन में होता है बच्‍चों के साथ भेदभाव

यहां सिस्‍टर्स और बच्‍चों के खाना बनाने की व्‍यवस्‍था अलग-अलग हैं, जहां सिस्‍टर्स का भोजनालय साफ सुथरा है, वहीं बच्‍चों का स्‍थान अत्‍यधिक गंदा पाया गया। इसके साथ यहां बच्‍चों का शौच स्‍थान बहुत गंदा मिला । जहां बच्‍चों के रहने की जगह पर गेंहूं भर कर रखा गया है। उम्र के अनुसार बच्‍चों को अलग-अलग रखने की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए, जिसका कि पालन यहां नहीं मिला। एक बच्‍ची का दस्‍ताबेजों में नाम परिवर्त‍ित किया गया है, उसे हिन्‍दू से ईसाई बना देना पाया गया है ।

बच्‍चों के रहवास स्‍थल में एक ही कमरे में मिली 10 शराब बोतले

वहीं राज्‍य आयोग के दूसरे सदस्‍य ओंकार सिंह ने बताया कि उन्‍हें निरीक्षण के दौरान एक कमरे से 10 बोतले शराब की मिलीं। सोचनेवाली बात है कि बच्‍चों के इस आवासीय परिसर में नशे का क्‍या काम? उन्‍होंने बताया कि यहां रसोई के फ्रीजर मांस से भरे हुए पाए गए। भयंकर बदबू आ रही थी। धर्मांतरण की व्‍यापक स्‍तर पर सामग्री मिली है। जब एक बच्‍चे से उसके बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि नहीं मालूम वह कहां से आया है। अभिभावक परेशान है, कई सालों से उन्‍हें उनके बच्‍चों से नहीं मिलने दिया गया है।

बालक-बालिका छात्रावास एक साथ संचालित होते पाए गए, नियमानुसार है गलत

ओंकार सिंह ने आगे बताया कि इसके अलावा कई जिलों के बच्‍चे यहां रहना पाए गए, जबकि नियमानुसार यदि उनके यहां बाल एवं बालिका गृह हैं तो उन्‍हें उनके जिले में रखना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यहां आयोग को बाल श्रम करवाए जाने का अंदेशा हुआ है, जिसकी आगे जांच की जाएगी। इसके साथ बालिका छात्रावास में भी तमाम गड़बड़ियां हैं। यहां संचालित हो रहे अधकांश कार्य नियमों से संचालित नहीं हो रहे ।

उन्‍होंने कहा कि यहां नियमविरुद्ध बड़ा मामला यह भी है कि बालिका और बालक छात्रावास एक साथ संचालित होते पाए गए, जबकि नियमों से इन्‍हें अलग-अलग संचालित होना चाहिए। बालक छात्रावास पंजीयन अवधि पूर्ण कर चुका है। वहीं बालिका छात्रावास का पंजीयन ही नहीं मिला। आयोग ने यह सभी मामले जिला प्रशासन के ध्‍यान में ला दिए हैं, आगे इस पर प्रभावी कार्रवाई अब जिला कलेक्‍टर के माध्‍यम से होना शेष है।

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