यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को जारी किए निर्देश
ग्वालियर/न.सं.। देश के सभी विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्तियों में अब विभाग/विषय नहीं बल्कि विश्वविद्यालयों को एक इकाई मानकर आरक्षण करना होगा। इस पर सख्ती एवं पूरी पारदर्शिता के साथ अमल करना होगा। पद आरक्षित करने में किसी तरह की लापरवाही एवं गड़बड़ी बिलकुल भी बर्दास्त नहीं होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) के संयुक्त सचिव डॉ. जी.एस. चौहान ने देश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र भेजकर इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि शिक्षकों की नियुक्तियों में आरक्षण करते समय विवि को एक इकाई माना जाए। जो विश्वविद्यालय पूर्व में विभाग/विषय को एक इकाई मानकर विज्ञापन निकाल चुके हें, उन्हें अब दोबारा विज्ञापन निकालना होगा। विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर आरक्षण करने संबंधी नियम भारत सरकार के राजपत्र में 7 मार्च 2019 को प्रकाशित हो चुके हैंं। इससे पहले विश्वविद्यालय मनमाने तरीके से विज्ञापन निकालकर पद आरक्षित करते थे, जिससे अपने चहेतों को फायदा पहुंचाया जा सके। इसे लेकर कई बार वाद-विवाद की स्थिति निर्मित होती थी और लोग न्यायालय की शरण में भी जाते थे। इसे देखते हुए यूजीसी ने यह कदम उठाया है।
नए नियमों में बढ़ जाएगी आरक्षित पदों की संख्या
यूजीसी पिछले वर्ष 5 मार्च 2018 को देश के सभी विश्वविद्यालयों में विभाग/विषय को एक इकाई मानकर आरक्षण करने का आदेश भी भेज चुका है। इस आदेश के तारतम्य में जो विश्वविद्यालय विज्ञापन निकाल चुके हैं, उन्हें अब नए सिरे से विश्वविद्यालयों को एक इकाई मानकर पुन: विज्ञापन निकालना होगा। यूजीसी के नए नियमों के तहत नियुक्तियों में आरक्षित पदों की संख्या बढ़ जाएगी एवं सामान्य वर्ग के पदों की संख्या कम हो जाएगी।
जीवाजी विवि ने अपने हिसाब से पद किए थे आरक्षित
दोबारा निकालना होगा विज्ञापन
शिक्षकों की नियुक्तियों के लिए अब जीवाजी विश्वविद्यालय को भी दोबारा विज्ञापन निकालना होगा। 2017 में विवि ने 51 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था, उसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 26 पद आरक्षित किए गए थे। जबकि 2015 में जीवाजी विवि द्वारा शिक्षकों के 47 पदों के लिए निकाले गए विज्ञापन में 36 पद आरक्षित किए गए थे। सिर्फ 11 पद सामान्य वर्ग के लिए थे। नियम निर्देशों के तहत विवि को नया विज्ञापन निकालना होगा।
फैक्ट फाइल
♦ अप्रैल 2017 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विभाग को इकाई मानने का आदेश दिया।
♦ मार्च 2018 में यूजीसी ने विभाग को इकाई मानने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा।
♦ केंद्र सरकार एवं यूजीसी ने उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
♦ मार्च 2019 में उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं यूजीसी की पुनर्विचार याचिका खारिज की।
♦ मार्च 2019 में केंद्र सरकार अध्यादेश ले आई जो कैबिनेट में पास हो गया है।
♦ अध्यादेश पास होने के बाद यूजीसी ने विवि को इकाई मानने के लिए सभी विवि को पत्र भेजा।