Vandana Katariya: ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली खिलाड़ी ने लिया संन्यास, भारत के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने का बनाया था रिकॉर्ड...

Update: 2025-04-01 09:38 GMT
ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली खिलाड़ी ने लिया संन्यास, भारत के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने का बनाया था रिकॉर्ड...
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Olympian Vandana Katariya retires : भारत को टैलेंट की खान कहा जाता है, जहां छोटे घरों से निकलकर बच्चे दुनिया भर में तिरंगे का मान बढ़ाते हैं। भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज खिलाड़ी वंदना कटारिया इसी मिसाल का जीता-जागता उदाहरण हैं। बता दें अब उन्होंने संन्यास लेने का फैसला लिया है। 15 अप्रैल 1992 को उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के हरिद्वार के रोशनाबाद में जन्मी वंदना ने अपनी हॉकी के जादू से दुनिया को चौंका दिया। तोक्यो ओलंपिक 2020 में न केवल साउथ अफ्रीका के खिलाफ नाजुक मोड़ पर हैट्रिक जड़ी, बल्कि ओलंपिक में पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बनने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बनाया।

2021 में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की ब्रांड एम्बेसडर बनकर उन्होंने समाज को एक नई दिशा भी दी। अब, वंदना ने अपने शानदार करियर को अलविदा कहने का फैसला लिया है, लेकिन उनकी उपलब्धियां हमेशा भारतीय हॉकी की शान रहेंगी।

वंदना कटारिया ने अपनी विदाई पर कहा

वंदना कटारिया ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय हॉकी से अलविदा ले लिया और अपने 15 साल के शानदार करियर को समाप्त करने का ऐलान किया। 32 वर्षीय स्ट्राइकर ने भारत के लिए 320 मैच खेले हैं और भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में सबसे ज्यादा मैच खेलने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। वंदना ने कहा, “आज एक भारी लेकिन कृतज्ञ मन से मैं अंतरराष्ट्रीय हॉकी से विदा ले रही हूं। यह निर्णय सशक्त और दुखी करने वाला दोनों है। मैं इसलिए नहीं हट रही हूं कि मेरी अंदर की आग बुझ गई है, बल्कि इसलिए क्योंकि मैं अपने करियर के शिखर पर संन्यास लेना चाहती हूं, जब मैं अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर हूं।”

वंदना कटारिया ने अपनी विदाई पर कहा, “यह थकान की वजह से नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय मंच को अपनी शर्तों पर छोड़ने का एक विकल्प है। मेरा सिर हमेशा ऊंचा रहेगा और मेरी स्टिक अब भी आग उगल रही होगी। भीड़ की गर्जना, हर गोल का रोमांच और भारत की जर्सी पहनने का गर्व हमेशा मेरे दिल में गूंजता रहेगा।” 2009 में सीनियर टीम में पदार्पण करने वाली कटारिया तोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय टीम का हिस्सा थीं, जो चौथे स्थान पर रही थी। इस ओलंपिक में उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ हैट्रिक लगाई और वह ऐसी पहली और इकलौती भारतीय महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने ओलंपिक में यह उपलब्धि हासिल की।

वंदना कटारिया ने अपनी विदाई के दौरान अपनी साथी खिलाड़ियों और कोचों को शुक्रिया अदा करते हुए कहा, “मेरी साथी खिलाड़ियों, मेरी बहनों से मैं यही कहूंगी कि आपके लगाव और विश्वास ने मुझे हमेशा बल दिया। मेरे कोचों और मेंटर्स ने अपनी सूझबूझ और मुझ पर भरोसे से मेरे करियर को आकार दिया।” हरिद्वार की रहने वाली कटारिया ने फरवरी में भुवनेश्वर में एफआईएच प्रो लीग में भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेला था।

इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा, “मेरे दिवंगत पिता मेरी चट्टान और मेरे मार्गदर्शक थे। उनके बिना मेरा सपना कभी पूरा नहीं हो पाता। उनके बलिदानों और प्यार से ही मेरे खेल की नींव पड़ी। उन्होंने मुझे सपने देखने, लड़ने और जीतने के लिए मंच दिया।”

वंदना कटारिया का अद्वितीय करियर

वंदना कटारिया का भारतीय हॉकी पर प्रभाव अत्यधिक गहरा था और उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया। उन्होंने 2016 और 2023 महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी, 2022 में FIH हॉकी महिला राष्ट्र कप में स्वर्ण पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अलावा वह 2018 एशियाई खेलों और 2013 और 2018 एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में रजत पदक जीतने वाली टीमों का हिस्सा थीं। वंदना ने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों, 2014 और 2022 एशियाई खेलों और 2021-22 FIH प्रो लीग में कांस्य पदक भी हासिल किए।

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