देश की सर्वोच्च अदालत ने न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई विवादित पोस्ट के मामले में केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष और सभी पदाधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल न्यायपालिका को डराने या न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक संयम को संस्थागत कमजोरी नहीं समझना चाहिए।
अभिव्यक्ति की आजादी पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ कर रही थी। अदालत ने केरल कांग्रेस के अध्यक्ष समेत सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं है। न्यायिक फैसलों की आलोचना करने का अधिकार सभी को है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्यायपालिका को डराने-धमकाने या न्याय प्रशासन में दखल देने का माध्यम नहीं बन सकती।
अदालत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है। कोर्ट का अधिकार किसी राजनीतिक दल के समर्थन या मंजूरी पर निर्भर नहीं करता, बल्कि संविधान और कानून के शासन से आता है। न्यायपालिका की गरिमा और उसके अधिकार को कमजोर करने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, पूरा मामला 12 अक्टूबर 2026 को केरल कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रकाशित एक पोस्ट से जुड़ा है। इस पोस्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग की गई थी।
पोस्ट में लिखा गया था, 'डियर सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है तो इस्तीफा दे दीजिए। हम आपके स्थान पर किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे, जो यह काम कर सके।'
यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद केरल कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X अकाउंट से पोस्ट हटा दी।
केरल कांग्रेस ने मांगी थी बिना शर्त माफी
विवाद के बाद केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने CJI सूर्यकांत से बिना शर्त माफी मांगी थी। पार्टी की ओर से कहा गया कि विवादित पोस्ट पार्टी कार्यकर्ता विजय थोट्टाथिल ने नेतृत्व की जानकारी, सहमति और अनुमति के बिना प्रकाशित की थी।
KPCC ने अपने जवाब में यह भी कहा कि पोस्ट पार्टी की आधिकारिक नीति या नेतृत्व के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। पोस्ट प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार कार्यकर्ता को उसकी जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। पार्टी ने इस घटना पर खेद जताते हुए बिना शर्त माफी भी दी थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने माफी को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत यह देखेगी कि माफी केवल कलम से मांगी गई है या वास्तव में दिल से भी मांगी गई है।
अवमानना के पहलू की होगी जांच
यह मामला अधिवक्ता विनीत जिंदल की ओर से CJI को लिखे गए पत्र के बाद सामने आया था। पत्र में विवादित पोस्ट को लेकर कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए याचिका दर्ज की।
अब अदालत इस बात की जांच करेगी कि विवादित पोस्ट न्यायालय की अवमानना के दायरे में आती है या नहीं। इसके लिए पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सहायता लेने का संकेत दिया है। साथ ही अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से भी सहयोग मांगा है।
अदालत यह भी परीक्षण करेगी कि मामले में सिविल या क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई की जरूरत है या नहीं। फिलहाल नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि केरल कांग्रेस को दोषी ठहरा दिया गया है। पार्टी पदाधिकारियों का जवाब मिलने और कानूनी पहलुओं की जांच के बाद ही सुप्रीम कोर्ट आगे का फैसला करेगा।