मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बड़ी खुशखबरी आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने 9 मार्च को पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है। कूनो में एक बार फिर नन्हे चीतों की किलकारियों ने जंगल का माहौल बदल दिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज्वाला और उसके सभी शावक फिलहाल स्वस्थ हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने दी जानकारी
सोमवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता की दिशा में एक बड़ी सफलता बताया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि कूनो आने के बाद ज्वाला ने यहां के वातावरण को अच्छी तरह अपना लिया है। अब वह पार्क की सबसे सफल मादा चीताओं में शामिल हो गई है। वन्यजीव विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लगातार हो रहे जन्म इस बात का संकेत हैं कि कूनो का पर्यावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।
Good News from Kuno National Park again...
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 9, 2026
Cheetah Jwala has given birth to 5 cubs, marking another major milestone for Project Cheetah. With this, India’s cheetah population has crossed the half-century mark, reaching 53.
A proud moment for wildlife conservation and a strong… pic.twitter.com/UfZz64zpJ6
वन विभाग की कड़ी निगरानी
वन विभाग के अनुसार ज्वाला और उसके पांचों नवजात शावकों की निगरानी विशेषज्ञों की टीम कर रही है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ मैदानी टीम भी लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती दिनों में शावकों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उन्हें फिलहाल सुरक्षित क्षेत्र में रखा गया है। टीम उनके स्वास्थ्य और गतिविधियों पर हर पल नजर रख रही है।
प्रोजेक्ट चीता को मिला नया बल
भारत में चीतों की वापसी के लिए शुरू किया गया प्रोजेक्ट चीता अब धीरे-धीरे सफलता की ओर बढ़ता दिख रहा है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया था। ज्वाला के पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
कूनो के जंगल में इन नन्हे मेहमानों के आने से उम्मीद और मजबूत हुई है कि आने वाले वर्षों में भारत में चीतों की आबादी स्थिर रूप से बढ़ सकती है।