भोपाल: भर्ती घोटाले में आजीविका मिशन के तत्कालीन सीईओ समेत तीन पर ईओडब्ल्यू में एफआईआर

बेलवाल पर भर्ती नियम बदलने एवं अवैध रूप से मानदेय स्वीकृत करने का आरोप;

Update: 2025-04-01 14:07 GMT
भर्ती घोटाले में आजीविका मिशन के तत्कालीन सीईओ समेत तीन पर ईओडब्ल्यू में एफआईआर
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विशेष संवाददाता, भोपाल। मप्र आजीविका मिशन में करीब आठ साल पहले हुए भर्ती घोटाले को लेकर ईओडब्ल्यू ने मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल समेत तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू ने शिकायत की जांच में पाया कि बेलवाल ने शासन को गुमराह करते हुए भर्ती के लिए नियमों को ही बदल दिया था। जिन अपात्रों की भर्ती की थी, उन्हें मनमाने तरीके से उच्च स्तरीय वेतन दिया गया था।

हालांकि यह भर्ती घोटाला तीन साल पहले उजागर हुआ था, जिसकी जांच आईएएस नेहा मारव्या ढाई साल पहले सरकार को सौंप चुकी थीं। जिसमें उन्होंने बेलवाल पर नियमों को दरकिनार कर भर्ती करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद मंत्रालय स्तर पर जांच रिपोर्ट दबी रही।

पिछले महीने शिकायतकर्ता राजेश मिश्रा ने आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाले की ईओडब्ल्यू में शिकायत की। जांच में आरोप सही पाए। इसके बाद मिशन के तत्कालीन सीईओ ललित मोहन बेलवाल, उपायुक्त विकास अवस्थी एवं सुषमा रानी शुक्ला को आरोपी बनाया गया है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार बेलवाल के कार्यकाल में वर्ष 2015 से 2018 के बीच राज्य, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर नियुक्तियां की गईं थीं। इसके लिए जो मापदंड तय किए गए थे, उन्हें शासन से बिना अनुमोदित कराए ही कई नियुक्तियां की गईं। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा सुषमा रानी शुक्ला को राज्य परियोजना प्रबंधक की नियुक्ति देने में किया गया। 15 साल का अनुभव नहीं होने के बाद भी, उन्हें नियुक्ति दी गई और 4 महीने के भीतर ही उनका 70 हजार रुपए महीने मानदेय स्वीकृत किया गया।

ईओडब्ल्यू ने जांच में पाया कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी ललित मोहन बेलवाल ने मिशन की मानव संसाधन नीति को बेईमानीपूर्वक प्रस्तुत किया। नीति में कूटरचित करके एचआर मैन्यूअल जोड़ा गया था। जिसके आधार पर कई नियुक्तियोंं में मनमानी की गई। संविदा नियुक्ति कर्मचारियों की 40 फीसदी मानदेय अवैध रूप से बढ़ाया। ईओब्डल्यू ने माना कि बेलवाल, अवस्थी और सुषमा रानी शुक्ला ने भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया। शासन को भी गुमराह किया। आजीविका मिशन में अवैध नियुक्तियां की जांच अभी जारी है। अन्य नियुक्तियां में भी फर्जीवाड़ा उजागर होने की संभावना है।

मंत्रालय ने दबाए रखी थी भर्ती घोटाले की रिपोर्ट

दरअसल, तत्कालीन सरकार के समय आजीविका मिशन में हुए भर्ती घोटाला उजागर हो चुका था। शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति की शिकायत पर शासन ने आईएएस नेहा मारव्या से जांच कराई। नेहा ने जांच में बड़ा भर्ती घोटाला उजागर कर दिया। करीब 264 पेज की जांच रिपोर्ट में मिशन के सीईओ बेलवाल समेत अन्य पर आरोप तय किए। सुषमा रानी शुक्ला की जांच को नियम विरुद्ध बताया। नेहा ने जून 2022 में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी। शासन ने रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की बजाए नेहा मारव्या को लूप लाइन में भेज दिया। शिकायकर्ता के अनुसार ललित मोहन बेलवाल पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस के करीबी हैं।

इस वजह से नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मामला उच्च न्यायालय गया तो विभाग ने सही तथ्य नहीं रखे। इस बीच 2023 में सरकार बदली। जैसे ही नेहा मारव्या की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का मामला पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल के पास पहुंचा तो, उन्होंने संचालक पंचायत मनोज पुष्प की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी। करीब 15 महीने तक सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया तो पिछले महीने मामला ईओडब्ल्यू पहुंचा। जांच एजेंसी ने प्रकरण दर्ज कर लिया है।

फर्जी बीमा, मशीन खरीदी घोटाला भी आएगा

ईओडब्ल्यू ने अभी नियुक्ति मामले में प्रकरण दर्ज किया है। जल्द ही महिला स्व सहायता समूहों की महिलाओं का फर्जी बीमा और अगरबत्ती मशीन खरीदी घोटाले में भी एफआईआर होगी। शिकायतकर्ता भूपेन्द्र प्रजापति के अनुसार बेलवाल के समय समूहों की महिलाओं ने बीमा के नाम पर करीब 70-80 करोड़ रुपए वसूले, इस राशि का कोई हिसाब नहीं है। करीब 367 अगरबत्ती मशीन खरीदी में भी घोटाला किया गया था।

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